बांग्लादेश की राजनीति को बड़ा झटका, बेगम खालिदा जिया का निधन
Dhaka/New Delhi : बांग्लादेश से एक बेहद दुखद और राजनीतिक रूप से अहम खबर सामने आई है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी (BNP) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का मंगलवार की सुबह निधन हो गया। उन्होंने ढाका के एवरकेयर हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर आते ही बांग्लादेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है और समर्थकों में गहरा सदमा है।
बेगम खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने देश की राजनीति को दशकों तक दिशा दी। उनका जाना सिर्फ एक नेता का जाना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति के एक पूरे युग का अंत माना जा रहा है।
चुनावी माहौल के बीच बड़ा झटका
खालिदा जिया का निधन ऐसे वक्त में हुआ है, जब बांग्लादेश में फरवरी महीने में आम चुनाव प्रस्तावित हैं। सोमवार को ही नामांकन की अंतिम तिथि थी और इसी दिन खालिदा जिया ने आगामी संसदीय चुनाव के लिए तीन अलग-अलग सीटों से नामांकन पत्र दाखिल कराया था। हालांकि, उनके प्रतिनिधियों ने रिटर्निंग ऑफिसरों के समक्ष पर्चे जमा कराए थे।
बीएनपी के कार्यकारी चेयरमैन और खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने भी दो सीटों से नामांकन दाखिल किया था। पार्टी की ओर से जानकारी दी गई थी कि 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के लिए खालिदा जिया और तारिक रहमान की ओर से कुल पांच सीटों पर नामांकन भरे गए हैं।
राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा असर
खालिदा जिया के अचानक निधन से बांग्लादेश की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। बीएनपी के लिए यह एक बड़ा भावनात्मक और संगठनात्मक झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका असर न केवल चुनावी रणनीति पर पड़ेगा, बल्कि विपक्षी राजनीति की दिशा भी बदल सकती है।
समर्थकों में शोक, नेताओं की श्रद्धांजलि
खालिदा जिया के निधन के बाद बीएनपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक का माहौल है। ढाका समेत कई शहरों में पार्टी कार्यालयों पर शोक सभाओं की तैयारी शुरू हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई नेताओं और राजनीतिक दलों की ओर से श्रद्धांजलि संदेश आने की उम्मीद है।
बेगम खालिदा जिया को एक मजबूत, संघर्षशील और प्रभावशाली नेता के तौर पर याद किया जाएगा, जिन्होंने बांग्लादेश की राजनीति में महिला नेतृत्व को नई पहचान दी।






