12 फरवरी की देशव्यापी हड़ताल: 30 करोड़ कामगार सड़कों पर, कई सेवाएं प्रभावित होने की आशंका

Nationwide Strike

नई दिल्ली: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साझा मंच द्वारा आहूत 12 फरवरी की देशव्यापी हड़ताल का असर पूरे देश में दिख सकता है। यूनियनों का दावा है कि इस बार करीब 30 करोड़ कामगार आंदोलन में शामिल होंगे, जिससे बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और पानी आपूर्ति जैसी कई अहम सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार की कथित “मजदूर-विरोधी और कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों” के खिलाफ यह हड़ताल बुलाई है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर के मुताबिक, यह आंदोलन देश के करीब 600 जिलों में असर डाल सकता है और इसे अब तक की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।

बैंकिंग और बीमा सेक्टर पर आंशिक असर
हालांकि सभी बैंक यूनियन इस हड़ताल में शामिल नहीं होंगी, लेकिन AIBEA, AIBOA और BEFI जैसी यूनियनें आंदोलन में हिस्सा लेंगी। कई सरकारी बैंकों ने पहले ही ग्राहकों को सतर्क करते हुए कहा है कि शाखाओं और प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ सकता है। बीमा क्षेत्र के कर्मचारी 100 प्रतिशत एफडीआई और नए श्रम कानूनों के विरोध में शामिल हो रहे हैं।

बिजली कर्मचारियों का बड़ा आंदोलन
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अनुसार, करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर निजीकरण, बिजली संशोधन विधेयक 2025 और राष्ट्रीय बिजली नीति 2026 के विरोध में हड़ताल करेंगे। उनकी प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग बंद करना, नियमित भर्ती और पुरानी पेंशन योजना की बहाली शामिल है।

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परिवहन और खनन सेक्टर भी होगा प्रभावित
यूनियनों का दावा है कि निजी और सरकारी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के कर्मचारी भी बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होंगे। खनन और गैस पाइपलाइन सेक्टर में भी कामकाज प्रभावित होने की संभावना जताई गई है।

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किसान संगठनों का समर्थन
संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाओं को मजबूत करने और नए श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान और मजदूर संगठन एकजुट नजर आ रहे हैं।

यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद उनकी मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकला, जिसके कारण यह देशव्यापी आंदोलन किया जा रहा है।

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