मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात: अमेरिका की चेतावनी, ड्रोन हमले और होर्मुज संकट
मुनादी लाइव: मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को 12 से अधिक देशों को तुरंत छोड़ने की चेतावनी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे “उच्च जोखिम वाली स्थिति” बताते हुए यात्रा परामर्श को सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा दिया है।
अमेरिकी ठिकानों पर हमले
सऊदी अरब, इराक और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए गए हैं। वहीं, लेबनान आधारित संगठन हिज्बुल्ला ने भी इजराइल पर हमले तेज कर दिए हैं। क्षेत्र में कई स्थानों पर धमाकों और मिसाइल अलर्ट की खबरें सामने आ रही हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर बड़ा संकट
ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा की है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत के लगभग 50 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात इसी रास्ते से होता है। ईरान की चेतावनी है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा चला तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
भारत की कूटनीतिक सक्रियता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने पांच प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों से चर्चा की है। श्रीनगर में सुरक्षा के मद्देनजर कई सड़कों को कंटीले तारों से ब्लॉक कर दिया गया है। एहतियातन सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से चार फ्लाइट भारत पहुंच चुकी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक लौटे हैं। विदेश मंत्रालय लगातार हालात पर नजर रखे हुए है।
सऊदी का जवाब और इजराइल का रुख
सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने आठ ड्रोन मार गिराए हैं। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि ईरान के साथ जारी जंग अभी खत्म नहीं होगी और सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
मिडिल ईस्ट का यह संकट अब वैश्विक स्वरूप लेता दिखाई दे रहा है। तेल आपूर्ति, हवाई यातायात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।








