रामगढ़ में खदान कर्मियों का विरोध: भुरकुंडा बलकूदरा माइंस में श्रम कानूनों के खिलाफ काला बिल्ला आंदोलन
रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित भुरकुंडा परियोजना के बलकूदरा माइंस में मंगलवार को खदान कर्मियों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मियों ने अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए काला बिल्ला लगाकर काम किया और सरकार के फैसले के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में खदान मजदूर शामिल हुए।
काला बिल्ला लगाकर जताया विरोध
बलकूदरा खुली खदान में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व पप्पू सिंह ने किया। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने काला बिल्ला लगाकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया, लेकिन उनके स्वर में आक्रोश साफ झलक रहा था। कर्मियों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि वे अपने अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।
“कोरोना में काम किया, अब अधिकारों पर चोट”
विरोध प्रदर्शन के दौरान पप्पू सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जब देश की अधिकांश फैक्ट्रियां बंद थीं, उस समय कोल इंडिया के खदान कर्मी लगातार काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हीं मजदूरों ने देश के बिजली घरों तक कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की, जिससे देश की ऊर्जा व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही। लेकिन अब उन्हीं मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
चार श्रम संहिताओं पर क्या है आपत्ति?
कर्मियों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे चार श्रम संहिताओं से मजदूरों के अधिकार कमजोर हो सकते हैं।उनकी प्रमुख चिंताएं इस प्रकार हैं:
- नौकरी की सुरक्षा में कमी
- श्रमिक अधिकारों में कटौती
- कार्य परिस्थितियों पर नकारात्मक प्रभाव
- ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलने की आशंका
श्रमिकों का आरोप है कि इन कानूनों के लागू होने से कंपनियों को अधिक शक्ति मिलेगी, जबकि मजदूरों की स्थिति कमजोर हो सकती है।
सरकार से कानून वापस लेने की मांग
प्रदर्शन के दौरान खदान कर्मियों ने एक स्वर में केंद्र सरकार से इन श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
बड़ी संख्या में कर्मियों की भागीदारी
इस विरोध प्रदर्शन में दर्जनों की संख्या में खदान कर्मी शामिल हुए। प्रमुख रूप से पप्पू सिंह, रमाकांत दुबे, अशोक गुप्ता, राजेश भगत, भोला खरवार, मनोज कुमार, प्रदीप राम, अजीत कुमार, गणेश बेदिया, नाकू सिंह, संतोष मुंडा, राजकुमार कर्माली, बबलू हांसदा, मुकेश बेलिया, मनीष मुर्मू, शंभू हांसदा, रमेश हांसदा, राजकुमार हांसदा, मुकेश मुर्मू और रामदेव मुंडा सहित कई अन्य श्रमिक मौजूद रहे।
झारखंड में फिर तेज हो सकता है मजदूर आंदोलन
झारखंड एक प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य है और यहां बड़ी संख्या में श्रमिक खदानों में कार्यरत हैं। ऐसे में श्रम कानूनों को लेकर बढ़ता असंतोष आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच संवाद नहीं हुआ, तो यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी बड़ा रूप ले सकता है।
भुरकुंडा बलकूदरा माइंस में हुआ यह विरोध प्रदर्शन यह दर्शाता है कि श्रमिकों के बीच श्रम संहिताओं को लेकर गहरी चिंता और असंतोष है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस विरोध को किस तरह से संबोधित करती है और क्या मजदूरों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है।








