बिहार विधानसभा सभा चुनाव का ऐलान, दो चरणों में होगा होगा चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की औपचारिक घोषणा आज कर दी गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में इस बार दो चरणों में मतदान होगा।
पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी, जबकि 16 नवंबर तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।

इस घोषणा के साथ ही बिहार में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। सत्ताधारी दलों से लेकर विपक्षी गठबंधनों तक, सभी ने अपने-अपने स्तर पर चुनावी तैयारी को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

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पहला चरण — 6 नवंबर को मतदान
पहले चरण में बिहार के दक्षिणी और मध्य जिलों की अधिकांश सीटों पर वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग के अनुसार, इस चरण में 15 से अधिक जिलों की करीब 120 सीटों पर मतदान होगा। इनमें पटना, गया, नालंदा, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, भोजपुर और रोहतास जैसे जिले प्रमुख हैं।

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चुनाव आयोग ने कहा कि सभी मतदान केंद्रों पर EVM और VVPAT मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम होंगे ताकि मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण और पारदर्शी हो सके।

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दूसरा चरण — 11 नवंबर को शेष सीटों पर वोटिंग
दूसरे चरण में उत्तर बिहार, सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र की सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में 119 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। कटिहार, पूर्णिया, अररिया, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, दरभंगा और सीवान जैसे जिलों में प्रमुख मुकाबले देखे जाएंगे।

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चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरे चरण के मतदान के बाद सभी परिणामों की गणना 14 नवंबर को एक साथ की जाएगी। इससे किसी क्षेत्रीय परिणाम के प्रभाव से बचने में मदद मिलेगी।

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नामांकन और आचार संहिता
पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया 10 अक्टूबर से शुरू होकर 18 अक्टूबर तक चलेगी। जबकि दूसरे चरण के लिए नामांकन 19 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक किया जा सकेगा।
घोषणा के साथ ही राज्य में आचार संहिता लागू हो गई है। अब किसी भी सरकारी घोषणा, कार्यक्रम या शिलान्यास पर चुनाव आयोग की अनुमति अनिवार्य होगी।

सुरक्षा और व्यवस्थाएँ
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस बार चुनाव में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किए जा रहे हैं। पूरे राज्य में अर्धसैनिक बलों की 600 से अधिक कंपनियाँ तैनात की जाएंगी।
इसके अलावा, संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त बल और सीसीटीवी मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है।
मतदान कर्मियों और अधिकारियों के लिए स्पेशल ट्रेनिंग सेशन भी आयोजित किए जा रहे हैं ताकि किसी भी तरह की त्रुटि से बचा जा सके।

तकनीक और पारदर्शिता पर ज़ोर
चुनाव आयोग ने बताया कि इस बार कई नई तकनीकें प्रयोग में लाई जाएंगी। मतदाता जानकारी और बूथ लोकेशन के लिए “वोटर हेल्पलाइन ऐप” को और उन्नत किया गया है।
वहीं, संदिग्ध खर्च, नकद या शराब वितरण पर नज़र रखने के लिए स्पेशल मोबाइल एप और कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
साथ ही सभी मतदान केंद्रों पर लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम की व्यवस्था होगी।

राजनीतिक समीकरण और मुकाबला
चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही बिहार में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन सत्ता बचाने की कोशिश में है, जबकि तेजस्वी यादव की अगुवाई में विपक्षी महागठबंधन इस बार पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर रहा है।
बीजेपी और जेडीयू के बीच सीट बंटवारे की चर्चा जोरों पर है, जबकि आरजेडी और कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है।
इधर, चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) और पप्पू यादव की पार्टी भी इस चुनाव में नए समीकरण बनाती नज़र आ रही हैं।

मुख्य मुद्दे: बेरोज़गारी, कानून-व्यवस्था और विकास
बिहार चुनाव 2025 का मुख्य एजेंडा बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था पर केंद्रित रहेगा।
जहां एनडीए सरकार अपने “विकास और स्थिरता के मॉडल” पर जनता का भरोसा मांग रही है, वहीं विपक्ष “विफलता और वादाखिलाफी” के मुद्दों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा —

“अब वक्त है बिहार को एक नई दिशा देने का। 6 और 11 नवंबर को जनता बदलाव की नई कहानी लिखेगी।”

वहीं, नीतीश कुमार ने कहा —

“हमने बिहार को अंधकार से निकालकर विकास के रास्ते पर लाया है। जनता इस बार भी स्थिर सरकार चुनेगी।”

मतगणना और परिणाम
दोनों चरणों के मतदान के बाद मतगणना 14 नवंबर को होगी।
चुनाव आयोग ने उम्मीद जताई है कि उसी दिन देर शाम तक अधिकांश सीटों के परिणाम स्पष्ट हो जाएंगे। 16 नवंबर तक पूरा चुनावी प्रोसेस समाप्त कर दिया जाएगा।

बिहार चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है। अब हर गली, हर गांव, हर नुक्कड़ पर सियासी तापमान चढ़ने वाला है।
यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार के अगले पांच वर्षों की दिशा तय करेगा।
अब नज़रें 6 और 11 नवंबर पर — जब जनता मतदान के ज़रिए अपने जनप्रतिनिधियों का भाग्य लिखेगी।

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