चाय के बाद अब नाश्ते पर महंगाई की मार, ब्रेड 5 रुपये महंगी

Bread Price Hike

दूध, LPG और पेट्रोल-डीजल के बाद अब ब्रेड के दाम बढ़े, युद्ध और महंगा तेल बना बड़ी वजह

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। पहले LPG सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और दूध के दाम बढ़े, अब ब्रेड भी महंगी हो गई है। 19 मई से कई कंपनियों ने ब्रेड की कीमतों में सीधे 5 रुपये तक का इजाफा कर दिया है, जिससे आम लोगों के सुबह के नाश्ते का खर्च और बढ़ गया है।

दूध के बाद अब ब्रेड महंगी
कुछ दिन पहले ही अमूल और मदर डेयरी जैसी कंपनियों ने दूध के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। इससे चाय और डेयरी उत्पादों की लागत पहले ही बढ़ चुकी थी। अब मॉर्डन ब्रेड समेत कई कंपनियों ने ब्रेड की कीमतें बढ़ा दी हैं। बाजार सूत्रों के मुताबिक ब्रिटानिया और अन्य ब्रांड भी जल्द दाम बढ़ा सकते हैं।

कितना महंगा हुआ ब्रेड?
नई कीमतों के अनुसार:

  • 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड: ₹55 से बढ़कर ₹60
  • आटा ब्रेड: ₹60 से बढ़कर ₹65
  • ब्राउन ब्रेड: ₹45 से बढ़कर ₹50
  • छोटी ब्रेड: ₹20 से बढ़कर ₹22

इस बढ़ोतरी का सीधा असर मध्यम वर्ग और रोजमर्रा के उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है।

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क्यों बढ़े ब्रेड के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक ब्रेड की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें हैं।

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महंगा हुआ कच्चा तेल
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ गई है।

प्लास्टिक पैकेजिंग महंगी
भारत बड़ी मात्रा में प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग सामग्री आयात करता है। ईरान युद्ध और वैश्विक सप्लाई संकट के कारण प्लास्टिक का आयात महंगा हो गया है, जिसका असर ब्रेड पैकिंग लागत पर पड़ा।

कमजोर हुई भारतीय करेंसी
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से आयातित कच्चा माल और पैकेजिंग दोनों महंगे हो गए हैं।

बढ़ी लॉजिस्टिक लागत
पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम बढ़ने से कंपनियों की डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है।

आम लोगों की बढ़ी परेशानी
लगातार बढ़ती महंगाई ने आम परिवारों का किचन बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। पहले गैस, फिर दूध और अब ब्रेड महंगी होने से सुबह का साधारण नाश्ता भी महंगा पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में और खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

कंपनियों पर बढ़ा दबाव
बेकरी और फूड कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया है। उधर उपभोक्ताओं का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने से घर का बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है।

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