होर्मुज स्ट्रेट से गुजर सकेंगे भारतीय जहाज, ईरान ने दी अनुमति

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मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत के जहाजों को सुरक्षित मार्ग

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। सूत्रों के अनुसार यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी।

ईरान ने जारी की चेतावनी
इससे पहले ईरान की नौसेना से जुड़े Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के नेवल कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तांगसिरी ने चेतावनी दी थी कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को ईरान से अनुमति लेनी होगी, अन्यथा उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।

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उन्होंने दावा किया कि ईरान की चेतावनी को नजरअंदाज करने वाले दो जहाजों को हाल ही में निशाना बनाया गया था।

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रमेश सिंह
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दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। ईरान और ओमान के बीच स्थित इस संकरे समुद्री रास्ते से रोजाना 20 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल गुजरता है। यह मात्रा वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा और समुद्री तेल व्यापार का करीब एक चौथाई हिस्सा मानी जाती है। दुनिया की बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी इसी मार्ग से गुजरती है।

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फारस की खाड़ी में मौजूद हैं भारतीय जहाज
भारत के शिपिंग मंत्रालय के अनुसार फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिनमें 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं, जिनमें 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं।

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भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर नजर
शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि 28 फरवरी 2026 से मंत्रालय और शिपिंग महानिदेशालय में 24 घंटे कंट्रोल रूम संचालित किया जा रहा है, जो इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। अधिकारियों, जहाज प्रबंधकों और भर्ती एजेंसियों को भारतीय दूतावासों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में काम करने का निर्देश दिया गया है ताकि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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