सरला बिरला पब्लिक स्कूल के छात्रों का कमाल, अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में बने वर्ल्ड टॉपर
विद्यालय के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण
रांची: रांची स्थित सरला बिरला पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। सिल्वर जोन फाउंडेशन द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में विद्यालय के छात्रों ने विश्व स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है।
यह उपलब्धि विद्यालय की मजबूत शैक्षणिक परंपरा और छात्रों की प्रतिभा का प्रमाण मानी जा रही है।
अंग्रेजी ओलंपियाड में वीर कुमार वर्मा बने विश्व विजेता
कक्षा द्वितीय के छात्र वीर कुमार वर्मा ने अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी भाषा ओलंपियाड (IOEL) 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने ओलंपियाड रैंक 1, जोनल रैंक 1 और कक्षा रैंक 1 हासिल कर ‘मेडल ऑफ अचीवमेंट’ अपने नाम किया। इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि उनकी भाषाई क्षमता और बौद्धिक दक्षता को दर्शाती है।
गणित ओलंपियाड में सर्वज्ञ यादव ने भी मारी बाजी
इसी कक्षा के छात्र सर्वज्ञ यादव ने अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड (IOM) 2025-26 में भी विश्व स्तर पर पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने भी ओलंपियाड रैंक 1, जोनल रैंक 1 और कक्षा रैंक 1 प्राप्त कर विद्यालय को गौरवान्वित किया। उनकी यह सफलता उनकी विश्लेषणात्मक सोच और गणितीय प्रतिभा को उजागर करती है।
अभिभावकों और शिक्षकों में खुशी की लहर
छात्रों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अभिभावकों ने गर्व और खुशी व्यक्त की। पूरे विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल देखने को मिला।
विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती मनीषा शर्मा ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता छात्रों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है।
शिक्षा के साथ उत्कृष्टता की मिसाल
प्राचार्या ने कहा कि ऐसी उपलब्धियां केवल परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि छात्रों के भीतर अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता की भावना को भी दर्शाती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि विद्यालय के विद्यार्थी भविष्य में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराते रहेंगे। सरला बिरला पब्लिक स्कूल के इन होनहार छात्रों की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और समर्पण के बल पर वैश्विक स्तर पर भी पहचान बनाई जा सकती है।
यह उपलब्धि न केवल विद्यालय बल्कि पूरे झारखंड के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।








