SBI हरमू ब्रांच में लोन फ्रॉड, फर्जी दस्तावेजों पर पांच पर FIR
Ranchi : राजधानी रांची के हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शाखा में सामने आए लोन धोखाधड़ी के मामले ने बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी वेतन पर्ची और जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लाखों रुपये का लोन लेने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की विधिवत जांच शुरू कर दी है।
कैसे सामने आया लोन घोटाला
इस पूरे मामले को लेकर SBI हरमू शाखा की मुख्य प्रबंधक दीप्ति प्रिया मिश्रा ने अरगोड़ा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, आरोपितों ने एक्सप्रेस क्रेडिट लोन लेने के लिए फर्जी सैलरी स्लिप, जाली पहचान पत्र और मनगढ़ंत दस्तावेज बैंक में जमा किए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक द्वारा ऋण स्वीकृत कर दिया गया।
ईएमआई बंद होते ही बढ़ा संदेह
लोन स्वीकृत होने के कुछ समय बाद ही आरोपितों ने ईएमआई का भुगतान बंद कर दिया। जब बैंक प्रबंधन ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया तो उनके मोबाइल फोन लगातार बंद मिले। इससे बैंक को मामले में गड़बड़ी का संदेह हुआ और आंतरिक स्तर पर दस्तावेजों की गहन जांच कराई गई।
जांच में उजागर हुआ दस्तावेजों का फर्जीवाड़ा
बैंक द्वारा कराए गए आंतरिक सत्यापन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिन संस्थानों में कार्यरत होने का दावा आरोपितों ने किया था, वहां से स्पष्ट हुआ कि इन लोगों ने कभी वहां काम ही नहीं किया। संबंधित विभागों से मिली जानकारी में यह भी पुष्टि हुई कि सभी वेतन पर्चियां, पहचान पत्र और अन्य कागजात पूरी तरह फर्जी थे।
इन पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
एफआईआर के अनुसार, इस मामले में मो जैनुल आबेदीन अंसारी, हर्ष शाह, मीना देवी, कालिंदर बड़ाइक और उकिली वेंकट राव को नामजद आरोपी बनाया गया है। बैंक प्रबंधन ने पुलिस को बताया है कि यह मामला सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का प्रतीत होता है।
पुलिस जांच में जुटी, और खुलासों की संभावना
अरगोड़ा थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इस लोन फ्रॉड के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है और क्या इससे जुड़े अन्य बैंक खातों या शाखाओं में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की गई है।
बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना के बाद बैंकिंग क्षेत्र में लोन स्वीकृति प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन की मजबूती को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से बचने के लिए डिजिटल और फिजिकल वेरिफिकेशन सिस्टम को और सख्त बनाने की आवश्यकता है।








