ट्रंप का फैसला भारत की ‘दुनिया के दवाखाना’ वाली ताक़त को पहुंचा सकता है चोट

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भारत की फार्मा इंडस्ट्री की वैश्विक पकड़

मुनादी लाइव डेस्क: भारत को लंबे समय से ‘दुनिया का दवाख़ाना’ कहा जाता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत ने 27.85 अरब डॉलर का ड्रग और फार्मास्युटिकल उत्पाद निर्यात किया। यही वजह है कि जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में शीर्ष स्थान रखता है।

अमेरिकी बाजार पर भारत की निर्भरता
यूएन कॉमट्रेड डेटाबेस ऑफ ग्लोबल ट्रेड स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, पिछले साल भारत ने अमेरिका को 9 अरब डॉलर के फार्मास्युटिकल उत्पादों का निर्यात किया।
भारत के कुल फार्मा निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 31.35% है, जो किसी भी अन्य देश से ज्यादा है।

ट्रंप का नया कदम और असर
अमेरिका भारत में निर्मित जेनेरिक दवाइयों का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। डोनाल्ड ट्रंप के नए फैसले के तहत आयात नीति सख्त होने और नए टैरिफ लगाने की संभावना जताई जा रही है। इससे भारतीय जेनेरिक दवाओं के लिए अमेरिकी बाजार तक पहुंच मुश्किल हो सकती है, जो देश की फार्मा इंडस्ट्री पर सीधा असर डालेगी।

फार्मा सप्लाई चेन में झटका
भारत वैश्विक फार्मा सप्लाई चेन में 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी रखता है। अमेरिकी नीति में बदलाव न केवल निर्यात को प्रभावित करेगा बल्कि दुनियाभर में दवाइयों की कीमत और उपलब्धता पर भी असर डाल सकता है।

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भारत के लिए चुनौतियां और विकल्प
अगर ट्रंप का यह फैसला लागू होता है तो भारत को यूरोपीय, एशियाई और अफ्रीकी बाजारों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सरकार और कंपनियों को नए बाजार खोजने और वैल्यू एडेड उत्पादों पर फोकस करने की जरूरत होगी।

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विशेषज्ञों की राय
फार्मा सेक्टर के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी बाजार के बिना भी भारत का जेनेरिक दवा क्षेत्र टिकाऊ है, लेकिन इससे अल्पकालिक झटका जरूर लगेगा। नीति आयोग के अनुसार, भारत को अपने रिसर्च और डेवलपमेंट खर्च को बढ़ाना होगा ताकि वह नई दवाओं और बायोटेक प्रोडक्ट्स में आगे बढ़ सके।

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