गुमला में आतंक का अंत? झांगुर गिरोह के मुखिया रामदेव उरांव की गुप्त अभियान में गिरफ्तारी
गुमला : गुमला जिले में लंबे समय से दहशत का पर्याय बने कुख्यात झांगुर गिरोह के मुखिया रामदेव उरांव की गिरफ्तारी ने पूरे इलाके में राहत का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस ने अत्यंत गुप्त ऑपरेशन चलाकर उसे राजधानी रांची से पकड़ा है। हालांकि पुलिस की ओर से आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक, यह गिरफ्तारी पिछले कई महीनों से चल रही निगरानी, खुफिया इनपुट और विशेष टीमों की लगातार सक्रियता का परिणाम है।
दो दशक तक रहा आतंक का साया
रामदेव उरांव पिछले बीस वर्षों से गुमला, बिशुनपुर, घाघरा और चौनपुर इलाके में भय और हिंसा का चेहरा रहा है। वर्ष 2002 में सक्रिय होने के बाद उसके गिरोह ने नरसंहार, अपहरण, रंगदारी, आगजनी और पुलिस पर हमलों जैसी कई संगीन घटनाओं को अंजाम दिया। उस पर 50 से अधिक गंभीर मामलों का रिकॉर्ड दर्ज है।
स्थानीय लोगों, खासकर ग्रामीणों और खनन क्षेत्रों में काम कर रहे ठेकेदारों के लिए झांगुर गिरोह का नाम ही दहशत पैदा कर देता था। महीनों तक रंगदारी वसूली, धमकी और हथियारबंद कार्रवाईयों ने पूरे इलाके को असहज कर दिया था। धीरे-धीरे ग्रामीण गतिविधियां प्रभावित होने लगीं और विकास कार्य भी ठप पड़ गया।
पुलिस की लगातार दबिश से कमजोर हुआ गिरोह
साल 2024–25 के दौरान पुलिस की कई सफल कार्रवाईयों के बाद गिरोह की ताकत तेजी से कम होती गई। 20 जनवरी 2025 को देवरागानी (घाघरा) में हुई पुलिस मुठभेड़ उसके गिरोह के लिए बड़ा झटका साबित हुई। इस मुठभेड़ में उसके करीबियों की गिरफ्तारी और कई हथियारों की बरामदगी ने गिरोह को कमजोर कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, उसी मुठभेड़ के बाद रामदेव लगातार ठिकाना बदलता रहा। कभी 30 से अधिक हथियारबंद उग्रवादियों के साथ चलने वाला यह डॉन अब गिरफ्तारी के समय महज 5–6 साथियों के साथ रह गया था। पुलिस की मजबूत दबिश, गांवों में बढ़ती मुखबिरी और लगातार चल रही खुफिया गतिविधियों ने उसे अलग-थलग कर दिया था।
रांची में गुप्त अभियान, सुरक्षित स्थान पर पूछताछ
खुफिया तंत्र को हाल ही में कई अहम इनपुट मिले थे, जिनके आधार पर रांची में एक संयुक्त टीम ने विशेष अभियान चलाया। इसी अभियान में पुलिस ने उसे बिना किसी प्रतिरोध के पकड़ लिया। फिलहाल उसे एक सुरक्षित स्थान पर ले जाकर पूछताछ की जा रही है।
पूछताछ में गिरोह के फंडिंग सोर्स, हथियारों के ठिकाने, सक्रिय कैडरों और स्थानीय सपोर्ट सिस्टम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह गिरफ्तारी झांगुर गिरोह के बची-खुची कड़ियों को तोड़ने में निर्णायक साबित हो सकती है।
छह शादियां, कई पत्नियाँ रहस्यमय तरीके से गायब
रामदेव के निजी जीवन से भी कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। उसने छह शादियां की थीं। लेकिन बढ़ते पुलिस दबाव, लगातार फरारी और संगठन में आपसी अविश्वास के बीच उसकी कई पत्नियां बीते वर्षों में संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गईं। उसका देवरागानी स्थित पैतृक घर पिछले वर्ष पुलिस द्वारा की गई कुर्की–जब्ती के बाद खंडहर में तब्दील हो चुका है। गांववालों का कहना है कि वह पिछले कई महीनों से गांव में नहीं दिखा था और केवल अपने विशेष कैडरों के जरिए संपर्क बनाए रखता था।
स्थानीय लोग बोले—“अब आएगी शांति”
गुमला, बिशुनपुर, घाघरा और आसपास के गांवों में उसकी गिरफ्तारी को राहत की बड़ी खबर के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से लोग उसके डर में जी रहे थे। स्कूल–कॉलेज जाने वाले छात्रों, किसानों, ठेकेदारों और व्यापारियों को अक्सर रंगदारी और धमकी का सामना करना पड़ता था।
एक स्थानीय बुजुर्ग ने कहा—
“रामदेव की गिरफ्तारी इलाके के लिए नई सुबह जैसी है। अब हम बिना डर के खेत–जंगल में जा पाएंगे।”
उग्रवाद के अंत की दिशा में बड़ा कदम
जिले में उग्रवादी गतिविधियां पिछले कुछ वर्षों में काफी कमजोर हुई हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों के बढ़ते ऑपरेशन्स और ग्रामीणों के सहयोग से नक्सल प्रभाव वाले कई क्षेत्रों में सामान्य जीवन लौट रहा है। ऐसे में रामदेव उरांव की गिरफ्तारी को उग्रवाद के लगभग अंत की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में पुलिस उसकी गिरफ्तारी को लेकर आधिकारिक घोषणा करेगी और पूरे गिरोह को खत्म करने के लिए अगले चरण की कार्रवाई शुरू करेगी।








