डी. ए. वी. नंदराज में दसवीं का मार्गदर्शन और परामर्श सत्र संपन्न

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“रुचि, सामर्थ्य और प्रेरणा स्रोत ही सफलता की कुंजी है” – डॉ. रवि प्रकाश

रांची: दसवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए डी. ए. वी. नंदराज पब्लिक स्कूल में मंगलवार को एक अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शन एवं परामर्श सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य परीक्षा से पहले विद्यार्थियों के मनोबल को मजबूत करना और अभिभावकों को सही भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना रहा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने कहा कि आने वाला एक महीना बच्चों के जीवन का बेहद महत्वपूर्ण समय है और इस दौरान माता-पिता की भूमिका निर्णायक होती है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे इस समय बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं, उनकी बातों को ध्यान से सुनें और दबाव डालने के बजाय उन्हें भावनात्मक संबल प्रदान करें।

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माता-पिता की भूमिका सबसे अहम
डॉ. तिवारी ने कहा कि परीक्षा की तैयारी के दौरान बच्चों का मन कई बार थकान, डर और असमंजस से घिर जाता है। ऐसे में माता-पिता का साथ उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बनता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले बच्चों की समस्याओं को धैर्य से सुनें फिर सलाह दें और निर्णय लेने की प्रक्रिया में बच्चों को सोचने का अवसर दें।

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उन्होंने यह भी कहा कि दसवीं के बाद विषय चयन, ग्यारहवीं की दिशा और भविष्य की योजना में माता-पिता मार्गदर्शक बनें, निर्णयकर्ता नहीं।

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रुचि और सामर्थ्य को पहचानना जरूरी
अपने प्रेरक संबोधन में प्राचार्य ने कहा—

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“सिर्फ इच्छा से सफलता नहीं मिलती। सफलता वही पाता है जो अपनी रुचि, सामर्थ्य और प्रेरणा स्रोत को पहचानता है।”

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उन्होंने छात्रों को यह समझाया कि बिना मेहनत केवल “बड़ा बनने” की चाह से लक्ष्य हासिल नहीं होते। सही दिशा में किया गया परिश्रम ही वास्तविक सफलता दिलाता है।

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नए विषय, नए अवसर
विद्यालय द्वारा इस वर्ष कई नए और आधुनिक विषय जोड़े गए हैं, जिनमें हेल्थकेयर, मार्केटिंग, मास मीडिया एंड स्टडीज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग, रोबोटिक्स एंड ड्रोन टेक्नोलॉजी, आईटी, फार्मास्युटिकल एंड बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल डायग्नोस्टिक, ब्यूटी एंड वेलनेस, फैशन स्टडीज आदि शामिल हैं । डॉ. तिवारी ने कहा कि छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनें, लेकिन यह याद रखें कि मेहनत का विकल्प कोई नहीं है।

स्वास्थ्य और अनुशासन पर भी जोर
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि भोजन सादा और संतुलित रखें, नींद पूरी लें,और जब पढ़ने बैठें तो पूरे ध्यान से पढ़ें। सत्र के अंत में उन्होंने सभी से बच्चों की सफलता के लिए प्रार्थना करने और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की अपील की।

यह मार्गदर्शन सत्र न केवल परीक्षा की तैयारी बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायी पहल साबित हुआ।

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