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AI पर बढ़ता खर्च बना कंपनियों के लिए सिरदर्द, Uber-Microsoft भी परेशान

AI Cost Crisis

लागत बचाने के लिए अपनाया गया AI अब कंपनियों पर डाल रहा भारी आर्थिक बोझ, कंपनियां बदल रही रणनीति

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों में जिस तरह का उत्साह दिखा था, अब उसकी हकीकत सामने आने लगी है। जिन कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या घटाकर AI को लागत बचाने का बड़ा हथियार माना था, अब वही कंपनियां बढ़ते खर्च से परेशान नजर आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Uber का सालभर का AI बजट महज चार महीने में ही खत्म हो गया। वहीं Microsoft ने भी अपने कर्मचारियों को AI टूल्स के सीमित इस्तेमाल की सलाह दी है, क्योंकि इसका खर्च उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ रहा है।

Uber के सामने बजट संकट
सूत्रों के अनुसार Uber ने पूरे साल के लिए जो AI बजट तय किया था, वह सिर्फ चार महीनों में ही खत्म हो गया। कंपनी के COO के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ते AI खर्च को कैसे नियंत्रित किया जाए। बताया जा रहा है कि लगातार बढ़ती प्रोसेसिंग लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च ने कंपनी की योजना को झटका दिया है।

Microsoft ने भी उपयोग सीमित करने को कहा
Microsoft जैसी दिग्गज टेक कंपनी ने भी कर्मचारियों से AI का सोच-समझकर इस्तेमाल करने को कहा है। कंपनी का मानना है कि हर छोटे-बड़े काम में AI के इस्तेमाल से क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा प्रोसेसिंग का खर्च तेजी से बढ़ रहा है।

आखिर इतना महंगा क्यों पड़ रहा AI?
विशेषज्ञों के मुताबिक बड़े स्तर पर AI चलाना बेहद महंगा सौदा है। इसके लिए जरूरत होती है:

  • हाई-एंड GPU सर्वर
  • भारी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर
  • लगातार डेटा प्रोसेसिंग
  • मॉडल ट्रेनिंग और फाइन-ट्यूनिंग
  • तकनीकी मॉनिटरिंग
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यानी यह एक बार का निवेश नहीं बल्कि लगातार बढ़ने वाला ऑपरेशनल खर्च है।

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कर्मचारियों की जगह AI लाना पड़ा भारी
कई कंपनियों ने लागत घटाने के लिए कर्मचारियों की छंटनी कर AI पर दांव लगाया था। लेकिन अब साफ हो रहा है कि AI ने लागत घटाने के बजाय कई जगह नया खर्च जोड़ दिया है। AI सिस्टम को चलाने और मॉनिटर करने के लिए कंपनियों को नए विशेषज्ञ रखने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च और बढ़ रहा है।

‘हाथी पालने’ जैसा हो गया AI
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि कई कंपनियों के लिए AI अब “हाथी पालने” जैसा साबित हो रहा है। यानी शुरुआत में यह लागत बचाने वाला समाधान लगा, लेकिन अब इसके रखरखाव और उपयोग का खर्च कंपनियों पर भारी पड़ रहा है।

अब बदलेगी रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां अंधाधुंध AI अपनाने की बजाय केवल उन्हीं क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल करेंगी, जहां लागत और लाभ का संतुलन स्पष्ट होगा। अब कंपनियों का फोकस Selective AI Deployment पर रहेगा, ताकि तकनीक का फायदा मिले लेकिन खर्च नियंत्रण में रहे।

यह साफ संकेत है कि AI भविष्य जरूर है, लेकिन फिलहाल यह सस्ता विकल्प नहीं बल्कि एक महंगा निवेश साबित हो रहा है।

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