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सोशल मीडिया पोस्ट से PFI जांच तक, HC में डोरंडा केस गरमाया

Doranda Case

रांची: डोरंडा थाना क्षेत्र में कार और मोटरसाइकिल की टक्कर से जुड़े चर्चित मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। माननीय न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने अधिवक्ता मनोज टंडन के खिलाफ चल रही किसी भी प्रकार की जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले के बाद कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

सोशल मीडिया पोस्ट पर अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने खुद को पीड़ित बताने वाले युवक मोबाज खान द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए कथित उग्र पोस्ट को गंभीरता से लिया। अदालत ने इस पहलू को जांच का महत्वपूर्ण बिंदु मानते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और Central Bureau of Investigation (CBI) को नोटिस जारी कर निर्देश दिया है कि मोबाज खान के प्रतिबंधित संगठन Popular Front of India (PFI) से किसी संभावित संपर्क या गतिविधि की जांच कर शपथपत्र के माध्यम से रिपोर्ट दाखिल की जाए।

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FIR रद्द करने और वाहन मुक्त करने की मांग
पूर्व अपर महाधिवक्ता रह चुके अधिवक्ता मनोज टंडन ने अपनी याचिका में उनके खिलाफ दर्ज FIR को निरस्त करने, जब्त वाहन को मुक्त करने और कथित उग्र भीड़ की भूमिका की जांच की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

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अगली सुनवाई 24 मार्च को
अदालत ने मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 24 मार्च की तिथि तय की है। तब तक जांच पर लगी रोक जारी रहेगी। अब सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां अदालत आगे की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दे सकती है।

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डोरंडा का यह मामला पहले से ही सुर्खियों में रहा है और हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद इसकी कानूनी दिशा पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।

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