एसपीजी मिशन स्कूल की जमीन पर बन रहे अवैध मॉल और भवन निर्माण पर जिला प्रशासन की रोक, बंदोबस्ती रद्द करने का आदेश

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ईसाई समुदाय, पूर्ववर्ती छात्रों और शिक्षाविदों की शिकायत पर हरकत में आया प्रशासन, उपायुक्त ने जारी किया आदेश

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के ऐतिहासिक एसपीजी मिशन बालक उच्च विद्यालय की जमीन पर अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग के लिए मॉल, मार्केट और आवासीय फ्लैट निर्माण के प्रयासों पर जिला प्रशासन ने अब सख्ती दिखाई है। जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त चंदन कुमार ने इस मामले में 15 जुलाई 2025 को आदेश जारी करते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। उन्होंने अपर उपायुक्त को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उक्त भूमि की बंदोबस्ती तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए, जमीन का अधिग्रहण कर उसे पुनः सरकार के नियंत्रण में लिया जाए और इस अवैध निर्माण कार्य में संलिप्त लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।

गौरतलब है कि एसपीजी मिशन स्कूल चाईबासा का एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान रहा है, जिसे राज्य सरकार द्वारा शिक्षा, खेलकूद और संस्थागत उद्देश्यों के लिए 3.40 एकड़ भूमि लीज पर दी गई थी। यह भूमि मौजा दुम्बीसाई, थाना संख्या 643 में स्थित है। 1913-14 के सर्वे रिकॉर्ड के अनुसार यह प्लॉट संख्या 598 है। ट्रांसफर डीड की शर्त संख्या 10 में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख है कि यह भूमि केवल स्कूल से जुड़ी गतिविधियों के लिए उपयोग की जा सकती है और इसे किसी भी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए प्रयोग करना पूर्णतः अवैध होगा।

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लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस भूमि पर चुपचाप मॉल, मार्केट और आवासीय इमारतों का निर्माण किया जा रहा था। स्कूल भवन को पीछे खिसका दिया गया, जबकि उसके मूल स्थान पर व्यावसायिक निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया। स्थानीय लोगों, ईसाई समुदाय के बुद्धिजीवियों, स्कूल के पूर्व छात्रों और शिक्षाविदों ने इस विषय पर बार-बार आवाज उठाई थी। उन्होंने उपायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री तक ज्ञापन सौंपे और सोशल मीडिया तथा समाचार माध्यमों के जरिए अभियान चलाया। जिससे प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बना।

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया। आयोग ने 30 जून 2025 को राज्य सरकार को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि यह जमीन केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लीज पर दी गई थी, इसे आवासीय या व्यावसायिक निर्माण में बदलना संविधान व लीज शर्तों का उल्लंघन है। आयोग के पत्र और अंचल अधिकारी के जांच प्रतिवेदन के आधार पर उपायुक्त ने कार्रवाई का निर्णय लिया।

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जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि मौजूदा समय में जिस स्थान पर स्कूल का पुराना भवन और सभागार था, उसे ध्वस्त कर वहां कई आवासीय फ्लैट्स, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और अन्य व्यावसायिक भवन बनाए जा रहे हैं। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि किसी भी वैधानिक प्राधिकरण से इसकी अनुमति नहीं ली गई थी। यह निर्माण कार्य झारखंड बिल्डिंग बाय लॉज 2016 और नगर परिषद अधिनियम 2011 का भी उल्लंघन करता है।

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उपायुक्त द्वारा जारी आदेश में नगर परिषद, चाईबासा के प्रशासक को निर्देश दिया गया है कि इन निर्माण कार्यों के लिए पारित नक्शे को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और सभी संबंधित पक्षों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि एसपीजी मिशन को दी गई जमीन शिक्षा के लिए है, न कि निजी लाभ या व्यावसायिक उपक्रमों के लिए।

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ईसाई समुदाय के नेताओं और पूर्व छात्रों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि स्कूल की विरासत और मूल उद्देश्य की रक्षा का प्रश्न है। यदि प्रशासन समय पर हस्तक्षेप नहीं करता तो यह एक खतरनाक उदाहरण बन सकता था, जहां शिक्षण संस्थानों की जमीन को मुनाफाखोरी के लिए बेच दिया जाता।

अब जब उपायुक्त ने संज्ञान लिया है, तो इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच संभव है। इस प्रकरण में स्कूल प्रबंधन समिति, भूमि माफिया, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी कर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। अगर जांच में किसी प्रकार की मिलीभगत सामने आती है, तो उन्हें कानूनी सजा दी जाएगी।

जिला प्रशासन की यह कार्रवाई न केवल एक अवैध निर्माण पर रोक है, बल्कि यह झारखंड के अन्य जिलों के लिए भी एक सख्त संदेश है कि सरकारी जमीन या लीज भूमि का दुरुपयोग अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल निर्माण कार्य पूरी तरह से रोक दिया गया है। नगर परिषद के इंजीनियरों की एक टीम मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द इस जमीन को पुनः सरकार के नियंत्रण में लेकर यहां स्कूल को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाएगा।

यह मामला अब राज्यभर में शिक्षा, भूमि और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर चर्चा का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन किस स्तर तक इस मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दिलवा पाता है।

मुनादी लाइव के लिए अमित की रिपोर्ट

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