मिडिल ईस्ट जंग का असर भारत तक: बेंगलुरु में होटल बंद, पुणे में श्मशान घाटों में गैस संकट

Hotel Closed

मुनादी लाइव: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के कई शहरों में दिखाई देने लगा है। गैस आपूर्ति में आई बाधा के कारण कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ शहरों में गंभीर संकट की स्थिति बन गई है। विशेष रूप से होटल, रेस्टोरेंट और श्मशान घाट जैसी आवश्यक सेवाएं इस संकट से प्रभावित हो रही हैं।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने गैस की कमी को लेकर कड़ा कदम उठाया है। होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि यदि जल्द गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो उन्हें अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़ेंगे। इसी चेतावनी के बाद कई होटल और रेस्टोरेंट ने संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

होटल-रेस्टोरेंट उद्योग पर बड़ा असर
बेंगलुरु में हजारों होटल और भोजनालय रोजाना बड़ी मात्रा में एलपीजी और पाइप्ड गैस का उपयोग करते हैं। गैस सप्लाई बाधित होने के कारण इन संस्थानों के लिए कामकाज जारी रखना मुश्किल हो गया है।

रेस्टोरेंट एसोसिएशन का कहना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में और अधिक प्रतिष्ठानों को बंद करना पड़ सकता है। इससे न केवल होटल उद्योग प्रभावित होगा बल्कि हजारों कर्मचारियों की आजीविका पर भी असर पड़ सकता है।

munadi live whattsapp banne.jpg

पुणे में श्मशान घाटों तक पहुंचा संकट
गैस की कमी का असर केवल होटल उद्योग तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां गैस की कमी के कारण कुछ श्मशान घाटों के संचालन में भी परेशानी आ रही है।

resizone elanza

Telegram channel

कई आधुनिक श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार के लिए गैस आधारित प्रणाली का उपयोग किया जाता है। गैस आपूर्ति प्रभावित होने से इन सुविधाओं के संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही है। स्थानीय प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक सेवा प्रभावित न हो।

मिडिल ईस्ट तनाव का वैश्विक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है। तेल और गैस के उत्पादन तथा परिवहन में बाधा आने से कई देशों में आपूर्ति की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण गैस की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर भारत सहित कई देशों की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

सरकार और कंपनियों की नजर स्थिति पर
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है तो गैस आपूर्ति जल्द सामान्य हो सकती है। फिलहाल उद्योग जगत और आम लोगों की नजर इस संकट के समाधान पर टिकी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *