पश्चिम एशिया में युद्ध का असर: पाकिस्तान में पेट्रोल ₹321 लीटर, भारत में ईंधन को लेकर अफवाहों पर तेल कंपनियों की सफाई
मुनादी लाइव : पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष तथा अमेरिका की सैन्य भागीदारी ने तेल बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। इसके कारण कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।
पाकिस्तान में पेट्रोल 321 रुपये प्रति लीटर
इस संकट का सबसे तत्काल प्रभाव पाकिस्तान में देखने को मिला है। वहां पेट्रोल की कीमत बढ़कर लगभग 321 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। जानकारी के अनुसार केवल एक दिन में ही पेट्रोल की कीमत में लगभग 55 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आयात पर निर्भर देशों में कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं।
अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट
युद्ध की आशंका और ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा है। अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख सूचकांक लगभग 47,000 अंक के आसपास आ गया। विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, बढ़ती बेरोजगारी दर और भू-राजनीतिक जोखिमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत में ईंधन की कमी की खबरें निराधार
इस बीच सामाजिक माध्यमों पर पेट्रोल और डीजल की संभावित कमी को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलने लगीं। इस पर भारतीय तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही है।
Indian Oil Corporation ने नागरिकों से अपील की है कि घबराकर पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं। कंपनी का कहना है कि ईंधन आपूर्ति और वितरण का पूरा तंत्र सुचारु रूप से कार्य कर रहा है और किसी प्रकार की घबराहट की आवश्यकता नहीं है।

रसोई गैस उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
सरकार ने स्थिति को देखते हुए तेल कंपनियों को रसोई गैस उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। यदि आपूर्ति पर दबाव बढ़ता है तो आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर वितरण व्यवस्था को बनाए रखने की तैयारी की जा रही है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर
पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। Reserve Bank of India द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह वृद्धि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
होर्मुज मार्ग पर संकट की आशंका
ऊर्जा विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। यदि इस मार्ग पर संकट गहराता है तो भारत सहित कई देशों के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
युद्ध का आठवां दिन, तनाव चरम पर
पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह युद्ध अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। ईरान और इजराइल दोनों ओर से हमले जारी हैं और अमेरिका की सैन्य मौजूदगी के कारण क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक तेल कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय बाजारों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया भर की निगाहें इस संकट के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।








