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पलामू में 80 करोड़ का सांप का जहर बरामद, तीन तस्कर गिरफ्तार

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वन विभाग और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त कार्रवाई, पैंगोलिन शल्क भी बरामद

पलामू : पलामू जिले से वन्यजीव तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) की संयुक्त टीम ने 80 करोड़ रुपये कीमत का सांप का जहर बरामद किया है। यह बरामदगी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क का हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, तस्कर इस जहर को स्थानीय स्तर पर इकट्ठा कर इंटरनेशनल मार्केट में भेजने की तैयारी कर रहे थे।

जबरदस्त छापेमारी के दौरान टीम ने कुल 1 किलो 200 ग्राम सांप का जहर बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 80 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

तीन तस्कर गिरफ्तार, सात लोग हिरासत में
पैंगोलिन का शल्क भी हाथ लगा—कीमत 15 लाख से अधिक कार्रवाई के दौरान वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार तस्कर हैं—

  • मोहम्मद सिराज (औरंगाबाद, बिहार)
  • मोहम्मद मिराज (औरंगाबाद, बिहार)
  • राजू कुमार (कौवाखोह, हरिहरगंज, पलामू)
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इसके अलावा सात अन्य लोगों को हिरासत में भी लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है। बरामदगी के दौरान टीम को पैंगोलिन का शल्क भी मिला है, जिसकी क़ीमत 15 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। पैंगोलिन दुनिया का सबसे अधिक तस्करी होने वाला जानवर माना जाता है और इसका शल्क अंतरराष्ट्रीय माफिया के बीच बहुत महंगा बिकता है।

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तीन दिनों से लगातार चल रही थी गुप्त छापेमारी
स्थानीय नेटवर्क के कई लिंक उजागर, कई और ठिकानों पर छापेमारी जारी पलामू टाइगर रिजर्व और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की टीम पिछले तीन दिनों से लगातार छापेमार अभियान चला रही थी।

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टीम को पहले से इनपुट मिला था कि पलामू के जंगल क्षेत्रों में–

  • सांप का जहर इकट्ठा किया जा रहा है
  • उसे बड़े सप्लायरों तक पहुंचाया जा रहा है
  • और अंतरराष्ट्रीय माफिया की मांग पर भेजा जा रहा है

इन सूचनाओं के आधार पर लगातार निगरानी की गई और फिर इस नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई की गई।

स्थानीय स्तर पर इकट्ठा किया गया था जहर—कौन सप्लाई करता था आगे?
वन विभाग कई इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रहा है | टीम ने बताया कि बरामद किया गया सांप का जहर स्थानीय स्तर पर इकट्ठा किया गया था, जिसे

  • सुखाकर,
  • कैप्सूलनुमा बक्सों में पैक कर,
  • विदेशी एजेंटों तक भेजने की तैयारी की जा रही थी।

वन विभाग अभी यह जांच कर रहा है कि—

  • सांप कहां और कैसे पकड़े गए?
  • जहर निकालने में कौन-कौन शामिल था?
  • कौन इसे खरीदता था?
  • और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह किन रैकेट का हिस्सा था?

सूत्रों के अनुसार जहर की आपूर्ति झारखंड के अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ नेटवर्क तक भी जाती थी।

पीटीआर उपनिदेशक का बयान—अभियान अभी जारी
“करोड़ों का जहर बरामद हुआ है… पूरा नेटवर्क खंगाला जा रहा है” | पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने पूरी कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने कहा—

“पूरे नेटवर्क के खिलाफ अभियान जारी है। करोड़ों का जहर बरामद हुआ है। यह जहर स्थानीय स्तर पर इकट्ठा किया गया था। कई इलाकों में अभी भी छापेमारी चल रही है।”

उन्होंने बताया कि इससे पहले भी पलामू टाइगर रिजर्व की टीम ने बाघ और अन्य वन्य जीवों के शिकार से जुड़े नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की थी।

पलामू—वन्यजीव तस्करी का उभरता हॉटस्पॉट? सांप का जहर, पैंगोलिन शल्क और वन्यजीव शिकार के मामले लगातार बढ़ रहे पलामू क्षेत्र—

  • बड़े जंगलों,
  • कम निगरानी,
  • और आर्थिक गतिविधियों की कमी

कारण वन्यजीव तस्करों का नया ठिकाना बनता जा रहा है। बीते एक साल में पीटीआर और WCCB ने—

  • पैंगोलिन तस्करी,
  • बड़े पैमाने की शिकार सामग्री,
  • अवैध हथियार
  • और सांप का जहर बरामद करने की कई कार्रवाइयाँ की हैं।

वन्यजीव अपराध पर भारी प्रहार—अंतरराष्ट्रीय तस्करी का बड़ा नेटवर्क उजागर
पलामू में 80 करोड़ रुपये के सांप के जहर की बरामदगी भारत में वन्यजीव अपराध के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक है। वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो का यह ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय तस्करी रोकने के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

छापेमारी जारी है, और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

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