बिहार में सत्ता का फॉर्मूला लगभग तय: BJP का CM, NDA सरकार, नीतीश की नीतियां होंगी आधार
बिहार में सत्ता का समीकरण तय: BJP का CM, NDA सरकार, नीतीश की नीतियों पर चलेगी सरकार
संयुक्त विधायक दल की बैठक के बाद होगा ऐलान, डिप्टी सीएम पद पर अभी भी बना हुआ है सस्पेंस
पटना: बिहार की राजनीति में पिछले डेढ़ महीने से जारी अनिश्चितता अब खत्म होने की ओर है। लंबे समय से चल रहे सियासी मंथन और अंदरूनी बैठकों के बाद अब नई सरकार के गठन का फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि राज्य में एनडीए (NDA) की सरकार बननी तय है, जिसमें मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हिस्से में जाएगा, जबकि सरकार की नीतियों का मार्गदर्शन नीतीश कुमार के अनुभव और दृष्टिकोण से होगा।
सूत्रों के अनुसार, अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है, जो संयुक्त विधायक दल की बैठक के बाद की जाएगी। अगले 3 से 4 दिनों में नई सरकार की पूरी तस्वीर सामने आने की संभावना है।
कैसे बना यह सियासी फॉर्मूला?
बिहार में 5 मार्च से ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी, जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की इच्छा सार्वजनिक की। इसके बाद से लगातार अटकलों का दौर जारी रहा। 30 मार्च को जब उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया, तब यह लगभग साफ हो गया कि वे राज्य की सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाकर राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ रहे हैं। इस दौरान बीजेपी और जेडीयू के बीच कई दौर की बातचीत हुई। जेडीयू की ओर से संजय कुमार झा और राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से लगातार संपर्क बनाए रखा। इन बैठकों में सत्ता के नए समीकरण को अंतिम रूप दिया गया।
गृह मंत्रालय और कैबिनेट पर बनी सहमति
सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा गृह मंत्रालय को लेकर था, जिस पर पहले मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं। लेकिन अब यह लगभग तय हो गया है कि गृह मंत्रालय बीजेपी के पास ही रहेगा। इसके अलावा मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी को लेकर भी दोनों दलों के बीच कोई बड़ा विवाद नहीं बचा है। हालांकि, डिप्टी सीएम पद को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। जेडीयू के भीतर इस बात पर मंथन जारी है कि निशांत कुमार को इस पद पर लाया जाए या नहीं। बीजेपी इस नाम पर सहमत बताई जा रही है, लेकिन अंतिम फैसला नीतीश कुमार के स्तर पर ही लिया जाएगा।
नीतीश कुमार की भूमिका क्यों अहम?
नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति का केंद्रीय चेहरा रहे हैं। भले ही अब मुख्यमंत्री पद बीजेपी को मिलने जा रहा है, लेकिन शासन की नीतियों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एक संतुलित सत्ता मॉडल होगा, जिसमें नेतृत्व बीजेपी के पास होगा, जबकि प्रशासनिक अनुभव और नीति निर्धारण में नीतीश का प्रभाव दिखेगा। यह मॉडल गठबंधन राजनीति का एक नया प्रयोग भी माना जा रहा है, जहां सत्ता और नीति के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष की उम्मीदों को झटका
इस पूरे घटनाक्रम के बीच महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्ष को उम्मीद थी कि राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं, लेकिन अब यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि उन्हें सत्ता में वापसी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। पिछले कुछ वर्षों में महागठबंधन को दो बार सत्ता में आने का मौका मिला था, लेकिन इस बार परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं दिख रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष को अब अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना होगा।
आगे क्या?
अब सबकी नजर संयुक्त विधायक दल की बैठक पर टिकी है, जहां नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा की जाएगी। यह बैठक बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।
डिप्टी सीएम पद को लेकर अंतिम फैसला, मंत्रिमंडल का गठन और सत्ता का संतुलन—ये सभी बिंदु आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे। अगर सब कुछ तय फॉर्मूले के अनुसार चलता है, तो बिहार में एक नई राजनीतिक संरचना देखने को मिलेगी, जो आने वाले चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकती है।








