बहरागोड़ा में टला बड़ा खतरा: 227 किलो का जिंदा बम सेना ने किया डिफ्यूज
जमशेदपुर के बहरागोड़ा में तीसरा जिंदा बम डिफ्यूज, 6 दिन बाद टला बड़ा खतरा
सुवर्णरेखा नदी किनारे मिला 227 किलो का बम, सेना के BDDS दस्ते ने सुरक्षित किया निष्क्रिय
जमशेदपुर/बहरागोड़ा: पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से मंडरा रहा बड़ा खतरा आखिरकार टल गया है। सुवर्णरेखा नदी किनारे स्थित पानीपाड़ा गांव में मिले 227 किलोग्राम के जिंदा बम को भारतीय सेना के बम निरोधक दस्ते (BDDS) ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया।
यह बम द्वितीय विश्व युद्ध के समय का बताया जा रहा है, जिसने पिछले छह दिनों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना रखा था। स्थानीय लोग लगातार भय के साये में जी रहे थे, लेकिन अब इस खतरनाक विस्फोटक के डिफ्यूज होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है।
6 दिन तक खतरे की जद में रहा इलाका
पानीपाड़ा गांव में यह बम मिलने के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया था। इलाके को घेरकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई थी। ग्रामीणों के बीच लगातार यह डर बना हुआ था कि अगर बम में विस्फोट हो गया तो भारी जन-धन का नुकसान हो सकता है। यही वजह थी कि प्रशासन ने किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए सेना की मदद ली।

तीसरा बम मिलने से बढ़ी चिंता
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह कोई पहला मामला नहीं था। इससे पहले भी इसी इलाके से दो जिंदा बम बरामद किए जा चुके हैं। लगातार तीसरे बम की बरामदगी ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका कभी सैन्य गतिविधियों या पुराने युद्धकालीन स्टोरेज का हिस्सा रहा हो सकता है।
सेना के BDDS ने संभाला मोर्चा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना के बम निरोधक दस्ते (BDDS) को बुलाया गया। सेना की टीम ने पूरे इलाके को सील कर सटीक योजना के तहत ऑपरेशन शुरू किया। सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करते हुए बम को नियंत्रित तरीके से निष्क्रिय किया गया। यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और जोखिम भरी थी, लेकिन विशेषज्ञता के कारण इसे बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
पुलिस और प्रशासन रहे अलर्ट
ऑपरेशन के दौरान स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे। अजित कुमार ने बताया कि पूरे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए हर कदम सावधानीपूर्वक उठाया गया।

ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
लगातार छह दिनों तक दहशत में जी रहे ग्रामीणों ने बम के निष्क्रिय होने के बाद राहत की सांस ली। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दौरान उनके बीच डर का माहौल था और वे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका से चिंतित थे। अब स्थिति सामान्य होने लगी है।
उठ रहे बड़े सवाल?
हालांकि बम के डिफ्यूज होने के बाद खतरा टल गया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक ही इलाके से बार-बार जिंदा बम क्यों मिल रहे हैं। क्या जमीन के नीचे अब भी और विस्फोटक दबे हो सकते हैं? क्या इस क्षेत्र में और सर्च ऑपरेशन की जरूरत है? इन सवालों के जवाब तलाशना अब प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए जरूरी हो गया है।

बहरागोड़ा में 227 किलो के जिंदा बम का सुरक्षित निष्क्रिय किया जाना निश्चित रूप से एक बड़ी राहत की खबर है। यह घटना एक ओर जहां सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और विशेषज्ञता को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत देती है कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में व्यापक जांच और निगरानी की आवश्यकता है।
फिलहाल, खतरा टल चुका है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी होगा।







