वैश्विक संकट के बीच भारत की नई आर्थिक रणनीति: पीएम मोदी और EAC की अहम बैठक, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर फोकस
7.7% GDP ग्रोथ को बताया आर्थिक मजबूती का संकेत, निवेश और सुधारों पर हुआ मंथन
नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत अपनी आर्थिक विकास यात्रा को नई गति देने की तैयारी में जुटा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सलाहकार परिषद (Economic Advisory Council to the Prime Minister – EAC-PM) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में देश की आर्थिक वृद्धि को तेज करने, निवेश को बढ़ावा देने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री और आर्थिक सलाहकार परिषद के बीच हुई इस बैठक में मुख्य रूप से उन रणनीतियों पर विचार किया गया, जो भारत को वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद तेजी से आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं। बैठक में वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कई नए सुझावों और सुधारात्मक उपायों पर मंथन किया गया।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की विकास रणनीति
बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि दुनिया भर में जारी आर्थिक अस्थिरता, युद्ध जैसी परिस्थितियों और व्यापारिक तनावों के बावजूद भारत अपनी विकास दर को कैसे मजबूत बनाए रख सकता है। विशेषज्ञों ने निवेश, बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। सरकार का मानना है कि भारत के पास मजबूत घरेलू बाजार, बढ़ती उपभोक्ता मांग और सुधार आधारित नीतियों की वजह से वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता है। इसी आधार पर आने वाले वर्षों में भारत को एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर विशेष फोकस
बैठक में कारोबार और निवेश के माहौल को और बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को अपनी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल करते रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में उद्योगों को प्रोत्साहन देने, निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने और व्यापारिक नियमों को और पारदर्शी बनाने की दिशा में नए कदम उठाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन बढ़ाने के लिए कारोबारी माहौल का अनुकूल होना बेहद जरूरी है। इसी वजह से बैठक में इस विषय को प्रमुखता से रखा गया।
7.7% GDP ग्रोथ पर सरकार का भरोसा
बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की 7.7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर को देश की आर्थिक मजबूती का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यह उपलब्धि पिछले 12 वर्षों में किए गए आर्थिक सुधारों का परिणाम है। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश सुधार और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उनका कहना था कि इन सुधारों का असर अब आर्थिक विकास के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
निवेश और रोजगार पर रहेगा जोर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विकास दर को बनाए रखने के लिए निवेश और रोजगार दोनों पर एक साथ ध्यान देना होगा। इसी उद्देश्य से सरकार उद्योगों, स्टार्टअप्स और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों पर काम कर रही है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि किस प्रकार नई तकनीकों, डिजिटल सेवाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में भारत
सरकार का दावा है कि वैश्विक आर्थिक मंदी और चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती दिखा रही है। मजबूत घरेलू मांग, बढ़ते निवेश, बुनियादी ढांचे में रिकॉर्ड खर्च और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने देश की विकास दर को गति दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुधारों की यही रफ्तार जारी रहती है तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में और मजबूत भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी और आर्थिक सलाहकार परिषद की यह बैठक भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य भारत को अगले दशक की आर्थिक चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करना है।





