JPSC परीक्षा विवाद: CID का बड़ा एक्शन, 8 ठिकानों पर छापेमारी; उप परीक्षा नियंत्रक समेत कई हिरासत में, चेयरमैन का इस्तीफा
JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने दिया इस्तीफा
ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद TDPL को कैसे मिला काम?
डेढ़ महीने पहले हुआ तबादला-श्वेता गुप्ता की भूमिका भी जांच के दायरे में
TDPL मैनेजर अभय तिवारी JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं में अभ्यर्थी के रूप में हासिल की सफलता
रांची: झारखंड लोकसेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच ने मंगलवार को बड़ा मोड़ ले लिया। सीआईडी (CID) और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC कार्यालय समेत आठ स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान परीक्षा संचालन से जुड़े कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और हार्ड डिस्क जब्त किए गए। पुलिस ने उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता सहित डेटा एंट्री, प्रोग्रामिंग और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े आठ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। जांच के दौरान परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के कार्यालय को भी सील कर दिया गया। देर रात तक कार्रवाई जारी रही और जांच एजेंसियों ने संकेत दिए कि आगे भी कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जाएगी।
मुख्यमंत्री बोले- “न्याय केवल होना नहीं चाहिए, होता हुआ भी दिखना चाहिए”
मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया से कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा,
«“न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ भी दिखना चाहिए।”»
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद जांच प्रक्रिया तेज हुई और उसी के बाद CID ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।
JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने दिया इस्तीफा
छापेमारी के बीच यह खबर भी सामने आई कि JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेज दिया है। हालांकि, राजभवन या राज्य सरकार की ओर से इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। एल. ख्यांगते वर्ष 1988 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्ति के बाद 27 फरवरी 2025 को JPSC के अध्यक्ष नियुक्त हुए थे।
ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद TDPL को कैसे मिला काम?
जांच के केंद्र में टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) भी है। जानकारी के अनुसार 20 मई 2025 को JSSC ने कथित अनियमितताओं के आरोप में TDPL को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद JPSC में एजेंसी को परीक्षा संचालन, ऑनलाइन आवेदन, एडमिट कार्ड, प्रश्नपत्र प्रिंटिंग, OMR स्कैनिंग, उत्तर पुस्तिका प्रोसेसिंग और परिणाम तैयार करने जैसे संवेदनशील कार्य दिए गए। इससे पहले अलग-अलग कार्य अलग-अलग एजेंसियों से कराए जाते थे। इसी एजेंसी ने नगर निगम कार्यपालक अभियंता, झारखंड स्वास्थ्य सेवा संयुक्त नियुक्ति परीक्षा, संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा सहित कई महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी कार्य संभाले थे।
श्वेता गुप्ता की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान यह सवाल भी उठ रहा है कि उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता का लगभग डेढ़ महीने पहले तबादला हो जाने के बावजूद वे JPSC के कार्यों से क्यों जुड़ी रहीं। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं।
डिजिटल सबूतों की जांच जारी
CID ने छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और परीक्षा संबंधी दस्तावेज जब्त किए हैं। फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञ इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं।
TDPL मैनेजर अभय कुमार तिवारी पर पहले भी लगे थे आरोप
TDPL के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी के खिलाफ पहले भी शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उन्होंने JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं में अभ्यर्थी के रूप में सफलता हासिल की और संगठित परीक्षा सिंडिकेट से जुड़े होने के आरोप लगाए थे।
OMR शीट में हेराफेरी के भी आरोप
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि FRO परीक्षा की 350 से अधिक OMR शीट, ACF परीक्षा की 150 से अधिक OMR शीट में कथित हेराफेरी हुई थी । इसके अलावा आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों से मूल प्रमाणपत्र, रद्द चेक, खाली स्टांप पेपर और हस्ताक्षरित दस्तावेज भी एकत्र किए गए थे। इन आरोपों की जांच जारी है और अभी इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
2024 से शुरू हुई थी शिकायतों की कड़ी
सूत्रों के अनुसार, JPSC में कथित अनियमितताओं की शिकायतें वर्ष 2024 से सामने आने लगी थीं। उस समय तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने कथित गड़बड़ियों की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी थी। बाद में उन्हें पद से हटा दिया गया और श्वेता गुप्ता ने परीक्षा संचालन से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें बढ़ती गईं और मामला अंततः मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा, जिसके बाद CID जांच शुरू की गई।
स्थापना के साथ विवादों में रहा है JPSC
JPSC का नाम पहले भी कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवादों में रहा है। आयोग की विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं से जुड़े कई मामले झारखंड उच्च न्यायालय में लंबित हैं, जबकि कुछ पुराने मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियां भी कर रही हैं।






