झारखंड राज्यसभा चुनाव: बैद्यनाथ राम और प्रणव झा ने दाखिल किया नामांकन
हेमंत सोरेन की मौजूदगी में महागठबंधन ने दिखाया शक्ति प्रदर्शन
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। महागठबंधन की ओर से JMM प्रत्याशी बैद्यनाथ राम और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा ने विधानसभा परिसर पहुंचकर नामांकन प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, महागठबंधन के कई वरिष्ठ नेता, मंत्री और विधायक भी मौजूद रहे। नामांकन के मौके पर गठबंधन की एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन साफ तौर पर देखने को मिला।
महागठबंधन ने दिखाई एकता
राज्यसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए JMM और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों का नामांकन कराया। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से राज्यसभा सीटों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच नामांकन के दौरान गठबंधन नेताओं का एक मंच पर दिखना खास संकेत माना जा रहा है।
कौन हैं महागठबंधन के उम्मीदवार?
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है। बैद्यनाथ राम राज्य की राजनीति में एक मजबूत दलित चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं। वहीं कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कम्युनिकेशन टीम से जुड़े प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है। उनके नाम की घोषणा के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज थी।
18 जून को होगा मतदान
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी है। नामांकन दाखिल होने के बाद अब सभी की निगाहें मतदान पर टिकी हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए 18 जून को मतदान होगा और उसी दिन परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे। महागठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के कारण दोनों उम्मीदवारों की जीत को लेकर गठबंधन खेमे में काफी उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि विपक्ष भी चुनावी मुकाबले को रोचक बनाने की तैयारी में जुटा हुआ है।
राजनीतिक रूप से अहम चुनाव
राज्यसभा चुनाव को झारखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह चुनाव केवल राज्यसभा सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि महागठबंधन की एकजुटता और राजनीतिक ताकत की भी परीक्षा माना जा रहा है। नामांकन के साथ ही अब चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है तथा राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम करेंगे।




