छठ की दिव्यता में डूबा आस्था का सैलाब, अस्ताचलगामी सूर्य को दिया गया अर्घ्य
मुनादी Live रांची: लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की भव्यता सोमवार की शाम झारखंडभर में चरम पर रही। राज्य के तमाम नदी-तालाबों और छठ घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों व्रती महिलाएं और परिवारजन पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर पूजा सामग्री — सूप, फल, ठेकुआ, दीप और नारियल लेकर घाटों पर पहुंचे और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। पूरा वातावरण छठ माता के भजन और पारंपरिक गीतों की गूंज से भक्तिमय हो उठा।

पूरे राज्य में भक्ति और श्रद्धा का माहौल
झारखंड का हर इलाका छठ की भावना में रंगा नजर आया। घाटों को दुल्हन की तरह सजाया गया — रंगीन लाइटों, फूलमालाओं और तोरण द्वारों से सजा हर घाट आस्था की चमक से दमक रहा था। महिलाएं जल में खड़ी होकर सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की प्रार्थना करती दिखीं।
लोकगीतों की मधुर धुनें — “केलवा के पात पर उगले सूरज देव” और “छठी मइया के महिमा अपार” — वातावरण में भक्ति का संचार कर रही थीं। छोटे बच्चे और युवा भी उत्साहपूर्वक इस पर्व में शामिल रहे।

सुरक्षा और व्यवस्था में प्रशासन सतर्क
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। घाटों पर पुलिस बल, होमगार्ड, एनडीआरएफ कर्मी और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की गई थी। अग्निशमन दल, गोताखोर टीम और एंबुलेंस standby पर रहे।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, भीड़भाड़ वाले घाटों पर सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न हो। नगर निगम और जिला प्रशासन ने सफाई, प्रकाश और जलनिकासी व्यवस्था को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ होगा समापन
सोमवार शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद अब व्रती मंगलवार, 28 अक्टूबर की प्रातः बेला में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर पूजा का समापन करेंगे। चार दिनों तक चले इस पर्व ने एक बार फिर यह साबित किया कि छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और समर्पण का प्रतीक है। पूरा झारखंड भक्ति, श्रद्धा और लोक आस्था की अनूठी छटा में नहाया हुआ नजर आया।







