राजद की नाराजगी: सीट बंटवारे पर असंतोष, गठबंधन में दरार की संभावना

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रांची: झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता की ओर से गठबंधन में सीट बंटवारे पर गहरी नाराजगी जाहिर की गई है। राजद नेता ने कहा कि 2019 में भी पार्टी ने गठबंधन में मजबूरी के चलते केवल 7 सीटों पर सहमति दी थी, क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को हराना था। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उस समय गठबंधन में कुछ विधायकों की गतिविधियां संदिग्ध थीं—कुछ विधायक कोलकाता में पकड़े गए थे और कई अन्य स्थानों पर।

राजद नेता ने बताया कि पार्टी का झारखंड में 22 स्थानों पर मजबूत आधार है और उनका कहना है कि राजद बीजेपी से लड़ने के लिए सबसे उपयुक्त पार्टी है। उन्होंने यह भी बताया कि राजद के नेताओं ने अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए संघर्ष किया है, जबकि बीजेपी नेताओं ने राजनीतिक अवसरवाद अपनाया। “हमने अपने नेताओं के जेल जाने को स्वीकार किया, लेकिन कभी बीजेपी की ‘वाशिंग मशीन’ राजनीति के आगे नतमस्तक नहीं हुए,” उन्होंने कहा।

राजद नेता ने यह भी कहा कि झारखंड में रहने वाले बिहार के लोग स्वाभाविक रूप से राजद को अपना राजनीतिक विकल्प मानते हैं। पार्टी ने हमेशा इन मतदाताओं के हितों का ध्यान रखा है, और यही कारण है कि राजद को झारखंड में व्यापक समर्थन मिलता है।

नेता ने बताया कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ एक बैठक हुई थी, जिसमें आपसी सहयोग पर सकारात्मक चर्चा हुई थी। लेकिन इसके तुरंत बाद, एकतरफा फैसला लिया गया और राजद को केवल 7 सीटें दी गईं। उन्होंने कहा, “शाम को एक और बातचीत हुई, लेकिन वह उतनी सौहार्दपूर्ण नहीं रही। इससे हमें गहरी पीड़ा हुई है

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उन्होंने कहा कि झारखंड में राजद का 23% वोटर आधार है, जिसे नजरअंदाज करना न सिर्फ कठिन बल्कि असंभव है। “हमारा संघर्ष और प्रतिबद्धता किसी भी अन्य दल से ज्यादा है। हम सृजन वाले लोग हैं, विध्वंस नहीं करेंगे। हमारी पार्टी हमेशा से सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की पक्षधर रही है। हम लड़ाई जीतेंगे, चाहे गठबंधन में रहें या अलग लड़ें।”

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राजद नेता ने स्पष्ट किया कि वे गठबंधन को मजबूत करना चाहते हैं, और सीएम हेमंत सोरेन को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, इसके लिए सभी दलों को एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 में जिन सीटों पर राजद के उम्मीदवार उपविजेता रहे, वहां वे इस बार भी मजबूती से चुनाव लड़ेंगे।

राजद नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पार्टी को 18 से 20 सीटें दी जाती हैं, तो यह उन्हें स्वीकार्य होगा। लेकिन अगर केवल 3 या 4 सीटों पर लड़ने की बात होती है, तो यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। “हम हर हाल में बीजेपी के विकल्प का हिस्सा बने रहेंगे, चाहे हम गठबंधन में रहें या अकेले लड़ें। हम अपनी नाव को डूबने नहीं देंगे, और हम हेमंत सोरेन को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे,” उन्होंने जोर देकर कहा।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सीट बंटवारे पर अभी एक और दिन की बातचीत बाकी है, जिसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। राजद इस बार अपने मजबूत 18 से 20 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

राजद नेता ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य न सिर्फ सीटें जीतना है, बल्कि झारखंड के मतदाताओं को एक स्पष्ट संदेश देना है कि वे बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत विकल्प हैं। उन्होंने कहा, “हम न सिर्फ गठबंधन को जीत की ओर ले जाएंगे, बल्कि अगर आवश्यक हुआ तो हम अकेले भी बीजेपी के खिलाफ मजबूती से खड़े होंगे। हमारी लड़ाई न सिर्फ सीटों की है, बल्कि उस व्यापक राजनीतिक दृष्टिकोण की है, जो झारखंड के लोगों के हितों को प्राथमिकता देता है।”

राजद नेता ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “हम किसी भी स्थिति में हार मानने वाले नहीं हैं। हम साथ रहकर जीतेंगे, और अगर कुछ सीटों पर लड़े तो भी हम अपनी लड़ाई लड़ते रहेंगे।”

राजद की यह स्थिति गठबंधन में दरार की ओर इशारा करती है, लेकिन पार्टी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वे बीजेपी के खिलाफ मजबूती से डटे रहेंगे, चाहे हालात जैसे भी हों।

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