महापरिनिर्वाण दिवस पर राहुल गांधी ने बाबासाहेब अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी

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संविधान की रक्षा साझा जिम्मेदारी – राहुल गांधी

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 70वीं पुण्यतिथि, महापरिनिर्वाण दिवस, के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रेरणा स्थल, संसद भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने बाबासाहेब की आदमकद प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उनके योगदान को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचारों और भारतीय संविधान की रक्षा करना केवल किसी एक दल या विचारधारा की नहीं, बल्कि हर भारतीय नागरिक की साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।

श्रद्धांजलि समारोह के पश्चात पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने बाबासाहेब अंबेडकर को एक महान राष्ट्रीय व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर के विचार आज भी भारत के लोकतांत्रिक, सामाजिक और संवैधानिक ढांचे के लिए दिशा-निर्देशक हैं। राहुल गांधी ने कहा कि बाबासाहेब ने एक ऐसा संविधान दिया, जिसने देश के अंतिम व्यक्ति को भी बराबरी, गरिमा और न्याय का अधिकार दिया।

“आज संविधान खतरे में है”—राहुल गांधी का स्पष्ट बयान
मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने भारतीय संविधान की वर्तमान स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा,
“आज हर भारतीय का संविधान खतरे में है। हम सबको मिलकर इसे बचाने के लिए खड़ा होना होगा।”

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अंबेडकर ने जिस संविधान की रचना की थी, उसका मूल उद्देश्य सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें इन मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन वे और उनकी पार्टी संविधान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

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एक्स पर भी दोहराई संवैधानिक मूल्यों की प्रतिबद्धता
शाम के समय राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी बाबासाहेब अंबेडकर को याद करते हुए एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन द्वारा 6 दिसंबर 2025 को प्रेरणा स्थल पर बाबासाहेब का 70वां महापरिनिर्वाण दिवस मनाया गया।

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राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में यह भी उल्लेख किया कि वे अंबेडकर द्वारा स्थापित संवैधानिक मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उनके इस संदेश को कांग्रेस समर्थकों और सामाजिक न्याय से जुड़े संगठनों ने व्यापक समर्थन दिया।

जनता के लिए खुला रहा श्रद्धांजलि कार्यक्रम
इस वर्ष महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को जनता के लिए भी खुला रखा गया था। बड़ी संख्या में लोग प्रेरणा स्थल पहुंचे और बाबासाहेब अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेता भी मौजूद रहे। पूरे वातावरण में बाबासाहेब के प्रति सम्मान और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प साफ झलक रहा था।

अंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने संविधान निर्माण के समय थे। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा आज भी एक बड़ी चुनौती है और बाबासाहेब का संविधान ही इसका सबसे मजबूत आधार है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने या हारने का नाम नहीं है, बल्कि यह जनता के अधिकारों, संस्थाओं की स्वतंत्रता और संविधान के सम्मान से जुड़ा हुआ है।

राजनीतिक संदेश भी साफ
राजनीतिक दृष्टि से भी राहुल गांधी का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले समय में उनकी राजनीति का केंद्र संविधान और सामाजिक न्याय रहेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महापरिनिर्वाण दिवस जैसे अवसर पर संविधान की सुरक्षा को केंद्र में रखकर बात करना, कांग्रेस की वैचारिक दिशा और राजनीतिक रणनीति को दर्शाता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर राहुल गांधी द्वारा दिया गया संदेश केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा। यह एक स्पष्ट राजनीतिक और सामाजिक अपील भी थी—संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होने की।

बाबासाहेब अंबेडकर की विरासत को लेकर यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब देश में संवैधानिक मूल्यों, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर लगातार बहस चल रही है। राहुल गांधी का यह बयान इस बहस में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

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