हाई सिक्योरिटी हजारीबाग जेल से 3 कैदी फरार, सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल

Prison Escape

Hazaribagh: लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा, हजारीबाग से तीन कैदियों के फरार होने की घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। यह जेल राज्य की सबसे हाई सिक्योरिटी जेलों में गिनी जाती है, जहां खूंखार अपराधी, नक्सली और कई हाई-प्रोफाइल विचाराधीन कैदी बंद हैं। ऐसे में तीन कैदियों का फरार हो जाना जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

कैसे फरार हुए तीनों कैदी
प्राथमिक जानकारी के अनुसार तीनों कैदी जेल के चार नंबर गुमटी से रस्सी के सहारे फरार हुए हैं। जेल के पीछे की ओर एक रस्सी बरामद की गई है, जो टेंट हाउस में इस्तेमाल होने वाले कपड़े के टुकड़ों से बनाई गई थी। घटनास्थल की स्थिति देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि रस्सी को पहले जेल के अंदर से बाहर फेंका गया और फिर बिजली से प्रवाहित सुरक्षा तार में फंसाकर फरारी की योजना को अंजाम दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक यह घटना रात करीब 1 से 2 बजे के बीच हुई। तीनों कैदी शौचालय जाने के बहाने बाहर निकले और शौचालय की खिड़की से फरार हो गए। जेल के बाहरी हिस्से में लगी तारबंदी भी टूटी हुई पाई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फेंसिंग पहले से ही क्षतिग्रस्त थी।

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बिजली प्रवाहित तार भी नहीं रोक सके फरारी
हैरानी की बात यह है कि जेल की चारदीवारी पर 24 घंटे बिजली प्रवाहित रहने वाले तार लगे हैं। इसके बावजूद कैदी इस सुरक्षा घेरे को तोड़ने में कामयाब रहे। यह पूरे सिस्टम की गंभीर चूक की ओर इशारा करता है।

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घटना के बाद जेल में हाई अलर्ट
कैदियों के फरार होने के बाद जेल के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। फिलहाल किसी को भी मुलाकात की अनुमति नहीं दी जा रही है। सभी कैदियों को उनके वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। जिले के वरीय अधिकारी, जिनमें एसडीओ, एसडीपीओ समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी, जेल के अंदर कैंप कर जांच में जुटे हुए हैं।

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जेल अधीक्षक का बयान
जेल अधीक्षक चंद्रशेखर सुमन ने फोन पर जानकारी देते हुए फरारी की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि,
“जेल से तीन कैदी फरार हुए हैं, लेकिन फिलहाल घटना के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की जा सकती। मामले की गहन जांच की जा रही है।”

पांच स्तरीय सुरक्षा वाला कारा, फिर भी चूक
लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। जेल के अंदर प्रवेश या बाहर निकलने के लिए हर व्यक्ति को इन सभी सुरक्षा घेरों से गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद इस तरह की घटना ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

ऐतिहासिक जेल, फिर चर्चा में
यह जेल ऐतिहासिक महत्व भी रखती है। अंग्रेजी हुकूमत के दौर में लोकनायक जयप्रकाश नारायण दीपावली की रात इसी जेल से फरार हुए थे। उन्हीं के नाम पर इस जेल का नामकरण किया गया है। संयोगवश, एक बार फिर यह जेल कैदियों की फरारी को लेकर सुर्खियों में है।

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