कैरव गांधी अपहरण मामला: बिहार तक पहुंची जांच, स्कॉर्पियो मालिक फरार
नौवें दिन भी नहीं मिला कोई सुराग, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित एसएसपी आवास के समीप से चर्चित उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले ने पुलिस के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। घटना को नौ दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो अपहृत कैरव गांधी का पता चल पाया है और न ही अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी हो सकी है। इस बीच जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस की टीम बिहार के नालंदा तक पहुंच गई है, जहां अपहरण में इस्तेमाल स्कॉर्पियो वाहन की कड़ी जुड़ती नजर आ रही है।
बिहार कनेक्शन: स्कॉर्पियो नालंदा के राजगीर की, मालिक फरार
जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है कि अपहरण में प्रयुक्त स्कॉर्पियो वाहन बिहार के नालंदा जिले के राजगीर थाना क्षेत्र के नई पोखर इलाके के निवासी राजशेखर के नाम पर रजिस्टर्ड है। इस सुराग के बाद पुलिस की एक विशेष टीम नालंदा पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही वाहन मालिक राजशेखर फरार हो चुका था।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने राजशेखर के घर पर कई बार छापेमारी की, मगर हर बार टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, आरोपी अपनी स्कॉर्पियो के साथ ही फरार है, जिससे जांच और अधिक जटिल हो गई है।
महिला मित्र से भी पूछताछ, फिर भी नहीं मिला ‘ब्रेकथ्रू’
मामले की जांच में पुलिस ने सोनारी थाना क्षेत्र में कैरव गांधी की एक महिला मित्र से भी पूछताछ की है। हालांकि, वहां से भी कोई ऐसी जानकारी सामने नहीं आई जो अपहरण की साजिश और अपहृत की लोकेशन तक पुलिस को सीधे पहुंचा सके। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या अपहरण के पीछे व्यक्तिगत संबंध, लेन-देन या किसी तरह की रंजिश जैसी वजहें हैं।
192 घंटे बीत गए, पुलिस खाली हाथ—दावों पर सवाल
यह अपहरण कांड 13 जनवरी को सर्किट हाउस इलाके के पास हुआ था, जिसने शहर में सनसनी फैला दी थी। कोल्हान रेंज के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा द्वारा लगातार जल्द खुलासा होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन 192 घंटे (करीब 8 दिन से अधिक) गुजर जाने के बाद भी पुलिस को कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।
नतीजतन, पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की दिशा पर सवाल उठने लगे हैं। इस बीच कैरव गांधी के घर के बाहर लगातार लोगों की भीड़ और परिवार की बेचैनी स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा रही है।
आरोपी राजशेखर का आपराधिक प्रोफाइल और ‘नई पोखर’ इलाका
पुलिस सूत्रों के अनुसार, राजशेखर के पिता का नाम उपेंद्र सिंह है, जो राजगीर में ‘मारवाड़ी बासा’ नामक होटल का संचालन करते हैं। राजशेखर इससे पहले नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड में एक कंप्यूटर कोचिंग सेंटर चलाता था, जिसे बाद में विवादों के चलते बंद करना पड़ा।
सबसे अहम बात यह है कि नई पोखर इलाका पहले से साइबर अपराधियों का गढ़ माना जाता रहा है। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि अपहरण के पीछे कोई संगठित गिरोह या अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
हाई अलर्ट के बावजूद आरोपी फरार, पुलिस के लिए चुनौती
हाई अलर्ट और लगातार छापेमारी के बावजूद स्कॉर्पियो मालिक का फरार हो जाना पुलिस के लिए कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि बिहार और झारखंड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई इस अपहरण मामले में कितनी जल्दी ठोस नतीजे तक पहुंच पाती है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच तेज कर दी गई है और सभी संभावित एंगल पर कार्रवाई जारी है, लेकिन पीड़ित परिवार और शहरवासियों को अभी तक केवल उम्मीद और आश्वासन ही मिल पा रहा है।








