झारखंड में आतंकी स्लीपर सेल की आहट? कपाली–मानगो के 6 युवक एजेंसियों के रडार पर
जमशेदपुर : झारखंड में आतंकी स्लीपर सेल की संभावित गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की संयुक्त जांच में सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली क्षेत्र के छह युवक सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, ये युवक बीते वर्ष जमात के नाम पर करीब छह महीने तक देश से बाहर रहे थे। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विदेश प्रवास के दौरान इन युवकों ने किन संदिग्ध लोगों से संपर्क किया और भारत लौटने के बाद झारखंड में उनकी गतिविधियां किन इलाकों तक सीमित रहीं।
कपाली और मानगो के युवक तलाश में
जांच एजेंसियों के अनुसार, फिलहाल कपाली के चार और मानगो आजादनगर के दो युवकों की तलाश की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि विदेश से लौटने के बाद ये युवक स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों को आतंकी स्लीपर सेल नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास कर रहे थे।
इसी कड़ी में चतरा जिले के एक संदिग्ध आतंकी के जमशेदपुर से संभावित संपर्कों की भी जांच की जा रही है। एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार झारखंड के कई जिलों से जुड़े हो सकते हैं।
इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस वाला नाम भी जांच में
इस पूरे मामले में मानगो आजादनगर निवासी सैयद मोहम्मद अर्शियान उर्फ हैदर भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। एजेंसियों के मुताबिक, हैदर ड्रोन हमलों में दक्ष बताया जाता है और वर्ष 2017 से फरार है। उसके खिलाफ इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है।
दिल्ली में हुई लंबी पूछताछ
आतंकी गतिविधियों के संदेह में धातकीडीह निवासी अब्दुल सामी और रज्जाक कॉलोनी निवासी नसीम को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पांच दिनों तक गहन पूछताछ के लिए दिल्ली में रखा था। हालांकि पूछताछ के दौरान किसी सक्रिय आतंकी नेटवर्क से जुड़े ठोस सबूत नहीं मिलने पर दोनों को छोड़ दिया गया।
बताया गया है कि अब्दुल सामी कपाली नगर परिषद के वार्ड नंबर छह का निवासी है, जबकि नसीम कपाली में किराए के मकान में रहता है। दोनों को 3 फरवरी को उनके आवास से हिरासत में लिया गया था।
2016 का पुराना मामला फिर चर्चा में
गौरतलब है कि अब्दुल सामी को 18 जनवरी 2016 को हरियाणा के मेवात से और नसीम को जमशेदपुर से अलकायदा से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसी मामले में मेवात से मोहम्मद सामी, ओडिशा से अब्दुल रहमान अली खान उर्फ कटकी और टाटानगर रेलवे स्टेशन से मौलाना कलीमुद्दीन की भी गिरफ्तारी हुई थी।
करीब नौ साल जेल में रहने के बाद अदालत ने 1 मार्च 2025 को अब्दुल सामी और नसीम को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।
एजेंसियां सतर्क, जांच जारी
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। जमशेदपुर, कपाली और मानगो क्षेत्र में खुफिया निगरानी बढ़ा दी गई है। एजेंसियों का कहना है कि यदि किसी भी तरह के आतंकी नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।








