बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना को मौत की सजा, कोर्ट ने तख़्तापलट हिंसा का दोषी माना
ढाका इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल का ऐतिहासिक फैसला, 2024 छात्र आंदोलन में हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया
बांग्लादेश: बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा झटका देते हुए ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता-विरोधी अपराधों में दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला 2024 में हुए देशव्यापी छात्र आंदोलन और उसके दौरान हुई हत्याओं से जुड़े उस मामले में आया है, जिसमें हसीना को “साजिशकर्ता, उकसाने वाली और आदेश देने वाली” की भूमिका में देखा गया।
कोर्ट के फैसले के साथ ही अदालत कक्ष में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर इसका स्वागत किया, जिसे बांग्लादेश न्यायपालिका के “ऐतिहासिक क्षण” के रूप में देखा जा रहा है।
2024 छात्र आंदोलन: हिंसा, मौतें और सत्ता से गिरावट
सजा का आधार बने मामले में आरोप था कि:
- 2024 में हुए छात्र आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों को कठोर कार्रवाई का आदेश दिया गया
- इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हुई
- ट्रिब्यूनल का दावा है कि हसीना ने “हत्या के निर्देश दिए और स्थिति को हिंसक बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई”
ढाका ICT ने इसे क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी की श्रेणी में रखा है।
दूसरा बड़ा झटका: पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमां खान को भी फांसी
इस मामले में सिर्फ हसीना ही नहीं, बल्कि उनके बेहद करीबी माने जाने वाले पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान को भी दोषी पाया गया है।
ट्रिब्यूनल ने कहा—
- असदुज्जमां खान 12 नागरिकों की हत्या में सीधे तौर पर शामिल थे
- उन्होंने सुरक्षा बलों को विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए “अत्यधिक बल प्रयोग” का आदेश दिया
- सबूतों और गवाहियों के आधार पर उन्हें भी फांसी की सजा सुनाई गई
कोर्ट ने दोनों नेताओं की बांग्लादेश में स्थित संपत्तियों को तुरंत जब्त करने का आदेश भी जारी किया है।
IGP अब्दुल्ला अल-ममून को 5 साल की सजा — सरकारी गवाह बनने से मिली राहत
इस मामले में तीसरे आरोपी, बांग्लादेश के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) अब्दुल्ला अल-ममून को पाँच साल की कैद की सजा सुनाई गई।
ट्रिब्यूनल के अनुसार—
- ममून सरकारी गवाह बन गए थे
- उन्होंने हसीना सरकार की “गुप्त रणनीति” और “सख्त दमन योजनाओं” का खुलासा किया
- इसी कारण उन्हें सिर्फ पाँच साल की सजा दी गई
फरार हसीना और असदुज्जमां—15 महीनों से भारत में छिपे होने का दावा
ढाका अदालत के आदेश में यह भी उल्लेख है कि:
- हसीना और असदुज्जमां पिछले 15 महीनों से भारत में रह रहे हैं
- वे तख्तापलट के समय ही बांग्लादेश छोड़कर भाग निकले थे
- सुरक्षा एजेंसियों को उनके बांग्लादेश लौटने की उम्मीद नहीं है
अदालत ने विदेश मंत्रालय और इंटरपोल को भी इस मामले में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
सजा सुनते ही कोर्ट में तालियां—न्यायपालिका ने कहा ‘ऐतिहासिक फैसला’
ढाका ट्रिब्यूनल के मुख्य न्यायाधीश ने फैसले के दौरान कहा—
“यह निर्णय सिर्फ एक राजनीतिक मुकदमा नहीं, बल्कि उन निर्दोष नागरिकों के लिए न्याय है जिन्हें बिना अपराध किए अपनी जान गंवानी पड़ी।”
अदालत कक्ष में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर इस फैसले का स्वागत किया। फैसले को बांग्लादेश के इतिहास में “सबसे बड़ा राजनीतिक और न्यायिक फैसला” कहा जा रहा है।
बांग्लादेश में राजनीतिक भूचाल—आगे क्या?
सजा के बाद बांग्लादेश की राजनीति एक बड़े संकट की ओर बढ़ गई है:
- हसीना की पार्टी अवामी लीग इस फैसले को “राजनीतिक प्रतिशोध” बता रही है
- विपक्ष ने इसे “देश के इतिहास का सबसे साहसिक न्यायिक फैसला” करार दिया है
- बांग्लादेश में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले पर प्रतिक्रियाएँ तेज हैं। कई मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा वर्षों से अनियंत्रित रही है और इस फैसले से “एक नई मिसाल” स्थापित हुई है।






