ईरान जंग के बीच राहत की खबर, होर्मुज खुलने के संकेत से तेल 5% लुढ़का
अमेरिका-ईरान बातचीत में प्रगति की उम्मीद, ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के नीचे; वैश्विक बाजारों को बड़ी राहत
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच वैश्विक बाजारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति की उम्मीद बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग दोबारा शुरू होने के संकेतों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को राहत दी है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट नॉर्थ सी क्रूड करीब 5 प्रतिशत गिरकर 94.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी क्रूड WTI में 5.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 88.31 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की उम्मीद
ईरान के सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के साथ संभावित समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में कारोबारी जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकती है। हालांकि रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था अमेरिकी सैन्य जहाजों पर लागू नहीं होगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री ट्रैफिक की निगरानी ईरान और ओमान संयुक्त रूप से करेंगे।
तैयार हुआ शुरुआती समझौता ड्राफ्ट
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती स्तर पर एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका ईरान के आसपास तैनात अपनी सैन्य ताकत को पीछे हटाएगा और समुद्री घेराबंदी समाप्त करेगा। इसके बदले ईरान अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट में कारोबारी जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करेगा।
क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में शामिल है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को सीधे प्रभावित करती है।
वैश्विक बाजार को मिलेगी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है। तेल कीमतों में गिरावट से:
- परिवहन लागत घट सकती है
- महंगाई पर दबाव कम हो सकता है
- आयातक देशों को राहत मिल सकती है
- वैश्विक व्यापार को मजबूती मिल सकती है
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है। यदि ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहता है तो भारत के लिए यह राहत की खबर हो सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम होगा और आने वाले दिनों में घरेलू बाजार को राहत मिल सकती है।
निवेशकों की नजर वार्ता पर
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हुई है। यदि दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौता हो जाता है तो तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि वार्ता विफल होने पर कीमतों में फिर उछाल आने की आशंका बनी रहेगी। फिलहाल होर्मुज में शिपिंग खुलने के संकेतों ने वैश्विक बाजारों को राहत दी है और तेल बाजार में आई गिरावट को इसी सकारात्मक संकेत का असर माना जा रहा है।






