होर्मुज पर फिर संकट! ईरान का ‘ताला’, अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
ईरान-US बातचीत की तैयारी के बीच तनाव बढ़ा, तेल सप्लाई पर मंडराया खतरा
मुनादी लाइव : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक बार फिर तनाव गहरा गया है। ईरान ने इस अहम जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा करते हुए संकेत दिया है कि हालात सामान्य नहीं हैं और इसके लिए उसने सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों, खासकर तेल व्यापार से जुड़े देशों की चिंता बढ़ा दी है।
ईरान का अमेरिका पर आरोप
ईरान का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ती अमेरिकी सैन्य गतिविधियां और दबाव की नीति ने हालात को अस्थिर बना दिया है। इसी के चलते उसे सख्त रुख अपनाना पड़ा। होर्मुज जलडमरूमध्य वह रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है।
ट्रंप का दावा और बयान
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया बयान में दावा किया है कि उन्होंने दुनिया के कई बड़े संघर्षों को खत्म कराया है। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को भी उन्होंने कम करने में भूमिका निभाई और अगर ऐसा नहीं होता तो करोड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने अब तक आठ बड़े युद्ध समाप्त कराए हैं और यदि ईरान-लेबनान को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या दस तक पहुंच जाती है। हालांकि उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बातचीत की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि 20 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठ सकते हैं। हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि यह वार्ता सफल होती है, तो क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद की जा रही है।
होर्मुज का वैश्विक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत बेहद बड़ी है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। खासकर भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, उनके लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। अगर यहां कोई बाधा आती है, तो तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा सकता है।
तेल सप्लाई और बाजार पर असर
वर्तमान स्थिति का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। बाजार पहले ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। यदि तनाव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ तेल कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।
NATO पर भी निशाना
ट्रंप ने इस दौरान NATO पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जरूरत के समय इस संगठन ने कोई मदद नहीं की। उन्होंने यहां तक कहा कि नाटो अब अप्रासंगिक हो चुका है और इसकी उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं।
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति पूरी तरह अनिश्चित बनी हुई है। एक तरफ तनाव है, तो दूसरी तरफ बातचीत की संभावना भी बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वार्ता सफल होती है, तो हालात सामान्य हो सकते हैं। लेकिन अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर मौजूदा हालात वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए अहम मोड़ साबित हो सकते हैं। अब सबकी नजर संभावित बातचीत और आने वाले दिनों में उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी है, जो तय करेंगे कि दुनिया राहत की ओर बढ़ेगी या नए संकट की तरफ।








