बोकारो वेतन घोटाले में बड़ा खुलासा: 3 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ तक पहुंची फर्जी निकासी, CID की जांच तेज
बोकारो: झारखंड में सरकारी सिस्टम की जड़ों को हिला देने वाले बोकारो वेतन घोटाले में अब जांच की कमान Crime Investigation Department (CID) ने संभाल ली है। सीआईडी की टीम ने बोकारो पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अकाउंट सेक्शन में पहुंचकर दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है। यह वही मामला है, जिसमें शुरुआती जांच में करोड़ों की अवैध निकासी सामने आई थी, लेकिन अब जांच आगे बढ़ने के साथ यह घोटाला और बड़ा होता जा रहा है।
सीआईडी टीम ने संभाली जांच की कमान
सीआईडी एसपी पूज्य प्रकाश के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम लगातार दस्तावेज खंगाल रही है। टीम अकाउंट सेक्शन में मौजूद फाइलों, भुगतान रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह फर्जीवाड़ा कितने स्तर तक फैला हुआ है। राज्य सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो और हजारीबाग में दर्ज मामलों को CID को सौंप दिया था, जिसके बाद जांच में तेजी आई है।

3.15 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ तक पहुंचा घोटाला
इस घोटाले की शुरुआत में लगभग 3 करोड़ 15 लाख रुपये की अवैध निकासी की बात सामने आई थी। लेकिन अब जांच में जो संकेत मिल रहे हैं, वह और भी चौंकाने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, यह राशि बढ़कर लगभग 10 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जिससे यह मामला राज्य के बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल होता नजर आ रहा है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
जांच में सामने आया है कि पुलिस विभाग के वेतन मद में हेराफेरी कर यह निकासी की जा रही थी। रिटायर्ड हवलदार के नाम का इस्तेमाल कर उसके स्थान पर आरोपी की पत्नी नीतू पांडे के बैंक खाते का विवरण डाल दिया गया। इसके बाद हर महीने लगभग 15 लाख रुपये तक की राशि वेतन के नाम पर निकाली जाती रही। यह सिलसिला एक-दो महीने नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलता रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सिस्टम में गंभीर खामियां मौजूद थीं।
मुख्य आरोपी पहले से जेल में
इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी पुलिस विभाग का अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे है, जो फिलहाल जेल में बंद है। पूछताछ में कई अहम जानकारी सामने आई है, लेकिन जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस घोटाले में और भी लोग शामिल हैं।
2020 से चल रहा था खेल
जानकारी के मुताबिक, यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2020 से ही लगातार किया जा रहा था। यानी कई वर्षों तक यह अवैध निकासी बिना किसी बड़े सवाल के जारी रही, जो सिस्टम की निगरानी और ऑडिट प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
इस मामले ने सरकारी वित्तीय व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी राशि का लंबे समय तक निकाला जाना इस बात का संकेत है कि या तो जांच में लापरवाही हुई या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत भी हो सकती है।
आगे क्या?
सीआईडी की जांच अब इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने पर केंद्रित है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही और कैसे इतने लंबे समय तक यह फर्जीवाड़ा चलता रहा। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
बोकारो वेतन घोटाला सिर्फ एक वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। अब सबकी नजर CID की जांच पर टिकी है, जो तय करेगी कि इस घोटाले की असली जड़ें कहां तक फैली हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।






