झारखंड के जननायक शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग तेज

Shibu Soren Bharat Ratna Shibu Soren Bharat Ratna

झारखंड विधानसभा में प्रस्ताव पारित, केंद्र को भेजा जाएगा संकल्प

रांचीः झारखंड के आदिवासी अस्मिता के सबसे बड़े प्रतीक और अलग राज्य निर्माण आंदोलन के अगुवा दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग अब आधिकारिक रूप से झारखंड विधानसभा से केंद्र सरकार तक पहुंच गई है। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र 2025 के चौथे दिन यह ऐतिहासिक संकल्प ध्वनिमत से पारित किया गया।

इस प्रस्ताव को परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा ने सदन में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि झारखंड के जन-जन की आवाज थे। उन्होंने महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन किया, आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष किया और अलग झारखंड राज्य के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

विधानसभा में गूंजा दिशोम गुरु का नाम
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी सहमति जताई। सदन में मौजूद विधायकों ने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में आदिवासी समाज की आवाज को बुलंद किया।
4 अगस्त 2025 को दिल्ली के एक अस्पताल में उनके निधन के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई थी। उनके योगदान को देखते हुए यह मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर भी बल पकड़ रही है कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।

राज्य सरकार ने जताई भावनाएं
झारखंड सरकार की ओर से कहा गया कि दिशोम गुरु का जीवन आदिवासी चेतना और संघर्ष की गाथा है। उन्हें भारत रत्न मिलने से न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश का आदिवासी समाज गौरवान्वित होगा।

Maa RamPyari Hospital

Telegram channel

केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव
विधानसभा में पारित संकल्प अब औपचारिक रूप से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड सरकार द्वारा पारित यह प्रस्ताव राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा दबाव बनाएगा और केंद्र को इस पर विचार करना ही पड़ेगा।

resizone elanza

झारखंड के जननायक की विरासत
शिबू सोरेन की विरासत झारखंड की जनता के लिए किसी पूंजी से कम नहीं है। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जरिए आंदोलन खड़ा किया, आदिवासी-वनवासियों की जमीन और संसाधनों पर हो रहे शोषण का विरोध किया और राज्य निर्माण का सपना पूरा किया।

the-habitat-ad

झारखंड के इतिहास में उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में हमेशा याद किया जाएगा, जिन्होंने अपने जीवन को समाज के सबसे पिछड़े और वंचित वर्गों के लिए समर्पित कर दिया। अब देखना होगा कि क्या केंद्र सरकार विधानसभा की इस सिफारिश को स्वीकार कर उन्हें भारत रत्न देने का फैसला करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *