बिहार चुनाव 2025: दूसरे चरण का मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न, शाम 5 बजे तक 67.14% वोटिंग दर्ज

Second Phase Voting

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान मंगलवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। निर्वाचन आयोग से प्राप्त अंतिम आंकड़ों के अनुसार, शाम 5 बजे तक कुल 67.14 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

इस चरण में 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सुबह 7 बजे मतदान की शुरुआत हुई और शाम 5 बजे तक कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। कई जगहों पर मतदान का समय बढ़ाया भी गया ताकि पंक्तियों में खड़े मतदाता अपने वोट डाल सकें।

जिलेवार वोटिंग प्रतिशत — किशनगंज में सबसे अधिक, नवादा में सबसे कम मतदान
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी विस्तृत आंकड़ों के अनुसार:

  • पश्चिम चंपारण: 69.02%
  • पूर्वी चंपारण: 69.31%
  • शिवहर: 67.31%
  • सीतामढ़ी: 65.29%
  • मधुबनी: 61.79%
  • सुपौल: 70.69%
  • अररिया: 67.79%
  • किशनगंज: 76.26% (सर्वाधिक)
  • पूर्णिया: 73.79%
  • कटिहार: 75.23%
  • भागलपुर: 66.03%
  • बांका: 68.91%
  • कैमूर (भभुआ): 67.22%
  • रोहतास: 60.69%
  • अरवल: 63.06%
  • जहानाबाद: 64.36%
  • औरंगाबाद: 64.48%
  • गया: 67.50%
  • नवादा: 57.11% (सबसे कम)
  • जमुई: 67.81%

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि सीमांचल के जिलों—किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और सुपौल—में इस बार मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जहाँ औसतन 72% से अधिक मतदान हुआ।

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3.7 करोड़ मतदाताओं ने तय किया 1302 उम्मीदवारों का भाग्य
इस चरण में 3 करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनमें 1.95 करोड़ पुरुष, 1.75 करोड़ महिलाएं, और 943 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल थे। कुल 1302 प्रत्याशी इस चरण में मैदान में थे, जिनमें 1165 पुरुष, 136 महिलाएं और एक थर्ड जेंडर उम्मीदवार थे।

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राज्य के कई मंत्री और पूर्व मंत्री भी इस चरण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प बन गया।

मुख्य सीटें और अहम मुकाबले
दूसरे चरण में जिन सीटों पर सबकी नज़र टिकी रही, उनमें गया, नवादा, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज प्रमुख रहीं। किशनगंज सीट पर एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। वहीं गया में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी उम्मीदवार का भविष्य दांव पर है, तो भागलपुर और पूर्णिया में स्थानीय जातीय समीकरणों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम — चार लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात
निर्वाचन आयोग और राज्य प्रशासन ने मतदान को लेकर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की थी। राज्यभर में चार लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी, जिसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बल की कंपनियाँ शामिल थीं, को तैनात किया गया।

सभी 45,399 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बल मौजूद रहे। इनमें से 40,073 केंद्र ग्रामीण इलाकों में और 5,326 केंद्र शहरी क्षेत्रों में बनाए गए थे। राज्य के 595 मतदान केंद्र महिला संचालित, 91 दिव्यांग संचालित, और 316 मॉडल बूथ के रूप में सजाए गए थे।

वेबकास्टिंग से निगरानी, हाईटेक मतदान केंद्र
इस बार के चुनाव की खास बात यह रही कि सभी मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग और लाइव निगरानी की व्यवस्था की गई थी।
निर्वाचन आयोग के कंट्रोल रूम से मतदान प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी गई।

दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं की सुविधा के लिए व्हीलचेयर, वॉलंटियर, रैंप और वाहन की व्यवस्था भी की गई थी।
मतदान के दौरान कहीं से भी किसी बड़े व्यवधान या हिंसा की सूचना नहीं मिली, जिससे आयोग ने इसे अब तक का सबसे शांतिपूर्ण चरण बताया है।

आयोग और नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया —

“मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।”

वहीं एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों के नेताओं ने अपने-अपने दावे किए।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा —

“जनता बदलाव चाहती है, और आज के मतदान में वही जनादेश झलक रहा है।”

जबकि जेडीयू के वरिष्ठ नेता ने कहा —

“लोग विकास के मुद्दे पर मतदान कर रहे हैं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जनता का भरोसा कायम है।”

अगला और अंतिम चरण निर्णायक होगा
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का तीसरा और अंतिम चरण आगामी सप्ताह होना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दूसरे चरण में सीमांचल और मगध क्षेत्रों में भारी मतदान से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। अब सबकी नजरें अंतिम चरण पर हैं, जो राज्य की सत्ता का समीकरण तय करेगा।

लोकतंत्र के रंगों से रंगा बिहार
बिहार के मतदाताओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता के हाथों में है। किशनगंज से लेकर कैमूर तक, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचे। 67.14 प्रतिशत का मतदान इस बात का संकेत है कि बिहार का मतदाता राजनीतिक रूप से जागरूक है और वह अपने भविष्य की दिशा खुद तय करने को तत्पर है।

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