Iran War Live: ट्रंप की चेतावनी, डील नहीं तो ईरान का इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह!
39वें दिन भी जारी भीषण जंग, सीजफायर की कोशिशें तेज, होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा
मुनादी लाइव : ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध मंगलवार को 39वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस बीच हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच लगातार हवाई हमले और मिसाइल अटैक जारी हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर—जैसे पुल और बिजलीघर—को निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब होर्मुज स्ट्रेट को खोलने को लेकर तनाव चरम पर है।
होर्मुज स्ट्रेट बना युद्ध का केंद्र
होर्मुज स्ट्रेट इस समय पूरे संघर्ष का सबसे अहम केंद्र बना हुआ है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। अमेरिका ने ईरान को इसे खोलने के लिए अल्टीमेटम दिया है, जबकि ईरान ने इसके बदले नई शर्तें रख दी हैं। सूत्रों के अनुसार, पहले दी गई डेडलाइन को 24 घंटे बढ़ाकर अब मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) यानी भारतीय समयानुसार बुधवार शाम 5:30 बजे तक कर दिया गया है।
लगातार हमले, बढ़ता मौत का आंकड़ा
युद्ध के 39 दिनों में अब तक हालात बेहद भयावह हो चुके हैं:
- अमेरिका-इजराइल के हमलों में 25 से ज्यादा लोगों की मौत
- हाइफा में ईरानी हमले के बाद मलबे से 2 शव बरामद
- लेबनान में इजराइली हमलों में कम से कम 15 लोगों की मौत
- कुल मृतकों की संख्या 3400 के पार, जिसमें ईरान में 1900 और लेबनान में 1400 शामिल
इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के इंटेलिजेंस चीफ मेजर जनरल माजिद खादेमी को मार गिराया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
सीजफायर की कोशिश, ‘इस्लामाबाद प्लान’ चर्चा में
युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र की ओर से मध्यस्थता की जा रही है। एक प्रस्तावित योजना—जिसे ‘इस्लामाबाद समझौता’ कहा जा रहा है—के तहत पहले 45 दिन का सीजफायर उसके बाद स्थायी शांति समझौते की कोशिश होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलने का प्रावधान । हालांकि, अभी तक इस योजना पर दोनों पक्षों की सहमति नहीं बनी है और अगले 48 घंटों में डील होने की संभावना कम बताई जा रही है।
इजराइल का बड़ा हमला
इजराइली रक्षा मंत्री ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल फैसिलिटी को निशाना बनाया है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 50% हिस्सा है। इससे ईरान की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्या होगा आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तय समय सीमा तक कोई समझौता नहीं होता है, तो यह संघर्ष और भी खतरनाक रूप ले सकता है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर लिया गया फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है।








