गढ़वा के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में फूड प्वाइजनिंग, 100 से अधिक छात्राएं बीमार; अस्पताल में भर्ती, अभिभावकों का फूटा गुस्सा
गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले के खरौंधी प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। हॉस्टल में रात का भोजन करने के बाद 100 से अधिक छात्राएं फूड प्वाइजनिंग (खाद्य विषाक्तता) की शिकार हो गईं। छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ने से स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में विद्यालय प्रशासन ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी, जिसके बाद सभी बीमार छात्राओं को अलग-अलग अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में सभी छात्राओं का इलाज जारी है। राहत की बात यह है कि अधिकांश छात्राओं की हालत स्थिर बताई जा रही है।
भोजन करने के कुछ ही देर बाद बिगड़ने लगी तबीयत
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात छात्राओं ने हॉस्टल में नियमित रूप से भोजन किया था। खाना खाने के कुछ ही समय बाद कई छात्राओं ने पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और घबराहट की शिकायत शुरू कर दी। धीरे-धीरे बीमार छात्राओं की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। स्थिति गंभीर होती देख विद्यालय प्रशासन ने तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क किया। सूचना मिलते ही डॉक्टरों की टीम और एंबुलेंस स्कूल पहुंची तथा छात्राओं को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया गया।
घटना के बाद विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। रातभर स्वास्थ्यकर्मी छात्राओं का इलाज करते रहे, जबकि प्रशासनिक अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए थे।
अस्पताल में चल रहा इलाज, हालत स्थिर
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, सभी छात्राओं का इलाज डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है। अधिकांश छात्राओं को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने के कारण उनकी स्थिति अब सामान्य बताई जा रही है। डॉक्टर लगातार छात्राओं के स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ भी तैनात किया गया है।
अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
घटना की सूचना मिलते ही शनिवार सुबह बड़ी संख्या में अभिभावक विद्यालय और अस्पताल पहुंच गए। परिजनों में स्कूल प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिली। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में लंबे समय से छात्राओं को गुणवत्ताहीन भोजन परोसा जा रहा था। परिजनों का कहना है कि बच्चों को जली हुई रोटियां, खराब गुणवत्ता की सब्जियां और निम्न स्तर का भोजन दिया जाता था। कई बार इसकी शिकायत विद्यालय प्रबंधन से की गई, लेकिन किसी प्रकार का सुधार नहीं किया गया। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा अब उनकी बेटियों को भुगतना पड़ रहा है।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच होती और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी। अभिभावकों ने विद्यालय की वार्डन, रसोइया और भोजन व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं दोबारा भी हो सकती हैं।
फूड सैंपल की जांच की तैयारी
प्राथमिक तौर पर मामला फूड प्वाइजनिंग का माना जा रहा है। हालांकि छात्राओं की तबीयत किस खाद्य पदार्थ के कारण बिगड़ी, इसका पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। संभावना है कि भोजन के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भोजन में किसी प्रकार की गड़बड़ी थी या नहीं।
प्रशासन की नजर पूरे मामले पर
जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
गढ़वा के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में एक साथ 100 से अधिक छात्राओं के बीमार होने की घटना ने सरकारी आवासीय विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी छात्राओं का इलाज जारी है और अधिकांश की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। अब सबकी नजर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह साफ होगा कि इस पूरे मामले का जिम्मेदार कौन है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।






