रातू रोड फ्लाईओवर का नाम ‘बिनोद बिहारी महतो’ के नाम पर हो — झारखंड के आंदोलनकारी हिमांशु कुमार की मांग

रातू रोड फ्लाईओवर

रांची,विशेष रिपोर्ट: झारखंड की राजधानी रांची में बहुप्रतीक्षित रातू रोड फ्लाईओवर बनकर तैयार है। इसका लोकार्पण 19 जून 2025 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा प्रस्तावित है। इसके साथ ही अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि इस फ्लाईओवर का नाम झारखंड आंदोलन के पुरोधा और महान जननायक बिनोद बिहारी महतो के नाम पर रखा जाए।

कुछ दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मेकन-सिरमटोली फ्लाईओवर का उद्घाटन करते हुए उसका नाम बाबा कार्तिक उरांव के नाम पर रखने की ऐतिहासिक पहल की थी, जिसे पूरे झारखंड में सराहा गया। इसी क्रम में झारखंड आंदोलनकारी हिमांशु कुमार, जो लंबे समय तक आजसू से जुड़े रहे हैं, ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि रातू रोड फ्लाईओवर का नामकरण बिनोद बिहारी महतो के नाम पर कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जाए।

“बिनोद बाबू के बिना झारखंड का इतिहास अधूरा है” — हिमांशु कुमार

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हिमांशु कुमार ने कहा कि:

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“विनोद बिहारी महतो, जिन्हें पूरा प्रदेश ‘विनोद बाबू’ कहकर सम्मानित करता है, उन्होंने ही झारखंड की अस्मिता और स्वाभिमान को पहली बार राष्ट्रीय विमर्श में लाकर खड़ा किया। उनका विचार ‘पढ़ो और लड़ो’ आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा है।”

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उन्होंने याद दिलाया कि विनोद बाबू का जीवन संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और सामाजिक समरसता की मिसाल है। धनबाद के बलियापुर जैसे पिछड़े क्षेत्र से निकलकर उन्होंने राज्य को राजनीतिक चेतना दी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्म लेने के बावजूद, एक ताने ने उन्हें कानून की डिग्री लेने और झारखंड आंदोलन का नेतृत्व करने तक प्रेरित किया।

झारखंड आंदोलन को समग्र पहचान देने वाले नेता

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हिमांशु कुमार के अनुसार:

“झारखंड आंदोलन पहले जहां आदिवासी स्वरूप में ही देखा जाता था, वहीं बिनोद बाबू ने उसे एक समग्र सामाजिक आंदोलन का रूप दिया, जिसमें गैर-आदिवासी भी बराबर से शामिल हुए। यही कारण है कि उन्हें झारखंड की राजनीति का भीष्म पितामह कहा जाता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय, भाषा-संस्कृति, विस्थापितों के अधिकार और युवाओं की भूमिका पर बिनोद बाबू का जो दृष्टिकोण था, वह आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है।

शिक्षा, संस्कृति और सम्मान के प्रतीक

विनोद बाबू ने खोरठा और कुरमाली भाषा की शिक्षा को संस्थागत स्वरूप दिलाया, रांची विश्वविद्यालय में पढ़ाई की नींव रखी। टुसू, जितिया, करम, गोहाइल, मनसा पूजा जैसे लोक पर्वों को सम्मान दिलाया और उन्हें झारखंड की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनाया।

“ऐसे महापुरुष के नाम पर यदि राजधानी का प्रमुख फ्लाईओवर नामित हो, तो यह न केवल एक श्रद्धांजलि होगी, बल्कि नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की एक क्रांतिकारी पहल भी होगी।”

राज्य सरकार से अपील: ‘नाम विनोद बाबू का, प्रेरणा सबकी’

हिमांशु कुमार ने राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और सड़क परिवहन मंत्रालय से अपील की है कि:

“झारखंड की माटी के सच्चे सपूत बिनोद बिहारी महतो के नाम पर रातू रोड फ्लाईओवर का नाम रखा जाए। यह राज्य की सामाजिक चेतना, युवा ऊर्जा और आंदोलन की विरासत को संबल देगा।”

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25 वर्षों के झारखंड ने भले कितनी भी विकास योजनाएं देखी हों, लेकिन सामाजिक सम्मान और सांस्कृतिक चेतना की बुनियाद बिनोद बाबू जैसे योद्धाओं ने ही रखी। इसलिए यदि हम उन्हें केवल स्मरण नहीं, सम्मान भी देना चाहते हैं, तो रातू रोड फ्लाईओवर का नामकरण एक सशक्त शुरुआत हो सकती है।

लेखक हिमांशु कुमार,झारखंड आंदोलनकारी, समाजसेवी और लंबे समय से आजसू से जुड़े हुए है।

यह लेख जनहित और सामाजिक चेतना के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है।
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