महंगाई पर लगाम के संकेत, RBI फिलहाल टाल सकता है बड़ा फैसला

RBI inflation rate

नई दिल्ली: देश में महंगाई को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। ताजा आर्थिक रिपोर्टों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY27) में खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान से कम रह सकती है। यदि ऐसा होता है तो अगस्त में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट बढ़ाने की संभावना काफी कम हो जाएगी। ब्रोकरेज फर्म यस सिक्योरिटीज की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार जून तिमाही में औसत खुदरा महंगाई दर RBI के 4.2 प्रतिशत के अनुमान से नीचे रहने की संभावना है। इससे केंद्रीय बैंक को फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मई में बढ़ी महंगाई, लेकिन चिंता की बात नहीं
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 3.48 प्रतिशत थी। मासिक आधार पर इसमें 0.75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पहली तिमाही का औसत अभी भी RBI के अनुमान से नीचे है। जून तिमाही में महंगाई को 4.2 प्रतिशत तक पहुंचने के लिए जून महीने में मुद्रास्फीति दर को 5 प्रतिशत से ऊपर जाना होगा, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम मानी जा रही है।

सब्जियों और ईंधन की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
मई महीने में खाद्य और पेय पदार्थों की महंगाई बढ़कर 4.5 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसकी सबसे बड़ी वजह सब्जियों के दामों में आई तेजी रही।एक महीने के भीतर टमाटर की कीमतों में 25.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं आलू 4.5 प्रतिशत और प्याज 2.1 प्रतिशत महंगा हुआ। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव महसूस किया गया। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी औसतन 1.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव का असर ईंधन कीमतों पर देखने को मिला।

कोर इन्फ्लेशन भी बढ़ी
खाद्य और ईंधन जैसी अस्थिर वस्तुओं को छोड़कर मापी जाने वाली कोर इन्फ्लेशन भी बढ़ी है। अप्रैल में यह 3.7 प्रतिशत थी, जो मई में बढ़कर 3.9 प्रतिशत पर पहुंच गई। विशेषज्ञों के अनुसार होटल, रेस्तरां, आवास सेवाओं और कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि ने भी महंगाई को ऊपर धकेलने में भूमिका निभाई है। चांदी के गहनों की कीमतों में सालाना आधार पर 155 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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अगस्त में क्या करेगा RBI?
आर्थिक जानकारों का मानना है कि फिलहाल RBI जल्दबाजी में ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा। केंद्रीय बैंक “डेटा आधारित” रणनीति अपनाते हुए अगले कुछ महीनों तक महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखेगा। हालांकि अल-नीनो की आशंका, कमजोर मानसून और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भविष्य में महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। ऐसे में RBI पूरी तरह सतर्क रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जून और जुलाई में महंगाई नियंत्रित रहती है तो अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रखा जा सकता है।

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अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
महंगाई के अनुमान से कम रहने की संभावना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। इससे न केवल आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी बल्कि उद्योगों और कारोबारियों के लिए भी सस्ता कर्ज उपलब्ध रहने की संभावना बढ़ेगी। अब सभी की नजर जून महीने के महंगाई आंकड़ों और अगस्त में RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी हुई है।

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