Bokaro Skeleton Case: DNA जांच पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, समय सीमा 48 घंटे से 1 हफ्ता

Bokaro Skeleton Case

बोकारो कंकाल कांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

बोकारो: झारखंड के बहुचर्चित बोकारो कंकाल कांड में डीएनए जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने युवती के माता-पिता के डीएनए सैंपल लेने के लिए पहले तय 48 घंटे की समय सीमा को बढ़ाकर अब एक सप्ताह कर दिया है। इस फैसले को जांच प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दरअसल, राज्य सरकार ने इस समय सीमा को अव्यावहारिक बताते हुए विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। सरकार का कहना था कि इतने संवेदनशील और तकनीकी प्रक्रिया में जल्दबाजी से त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए समय सीमा में विस्तार किया।

हाईकोर्ट की सख्त निगरानी
इस पूरे मामले की निगरानी झारखंड हाईकोर्ट कर रहा है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ इस केस पर लगातार नजर बनाए हुए है। पिछली सुनवाई में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए डीजीपी, बोकारो एसपी और एफएसएल डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था। इससे साफ है कि अदालत इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करना चाहती। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि बरामद कंकाल का डीएनए टेस्ट केंद्र सरकार की सीएफएसएल लैब, कोलकाता में कराया जाए। साथ ही राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट कोर्ट में सौंपने का आदेश दिया गया है।

31 जुलाई से लापता युवती, कंकाल पर विवाद
पूरा मामला पिंडराजोड़ा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां 18 वर्षीय युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है। युवती की मां रेखा देवी ने अपनी बेटी की तलाश के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जांच के दौरान पुलिस को एक कंकाल मिला, जिसे पुलिस लापता युवती का बता रही है। हालांकि, परिजनों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उनके अधिवक्ताओं विनसेंट रोहित मार्की और शांतनु गुप्ता का कहना है कि बरामद कंकाल उनकी बेटी का नहीं है। इसी विवाद को सुलझाने के लिए डीएनए जांच को सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है।

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अधिकारियों पर सख्ती, अगली सुनवाई अहम
हाईकोर्ट ने इस मामले में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई है। अदालत ने अगली सुनवाई में भी डीजीपी, बोकारो एसपी और एसआईटी टीम को सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही आर्मी हॉस्पिटल नामकुम को भी सैंपल कलेक्शन प्रक्रिया में सहयोग करने को कहा गया है, ताकि जांच में किसी भी तरह की तकनीकी कमी न रह जाए।

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बोकारो कंकाल कांड अब एक संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल केस बन चुका है, जिसमें हर कदम न्यायिक निगरानी में उठाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय सीमा बढ़ाने का फैसला इस बात का संकेत है कि जांच को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि पूरी सटीकता और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। अब सबकी नजर डीएनए रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस मामले की सच्चाई सामने लाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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