मनरेगा के तहत 125 दिन रोजगार देने पर सरकार कर रही विचार

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New Delhi : केंद्र सरकार महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट यानी मनरेगा में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट की हालिया बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना से जुड़े दो अहम प्रस्तावों पर गंभीर चर्चा हुई है। पहला प्रस्ताव ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का है |

मनरेगा देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी दी गई है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बीते कुछ वर्षों में इस गारंटी को पूरी तरह लागू करने में सरकारें असफल रही हैं। यही वजह है कि अब सरकार इस योजना में संरचनात्मक बदलाव पर विचार कर रही है।

100 दिन की गारंटी, लेकिन हकीकत में 50 दिन का रोजगार
हालांकि मनरेगा कानून के तहत हर परिवार को 100 दिन का रोजगार मिलना चाहिए, लेकिन आंकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश करते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति परिवार औसतन सिर्फ 50 दिनों के आसपास ही रोजगार मिल पाया। पिछले साल देशभर में केवल 40.70 लाख परिवार ही ऐसे थे, जिन्होंने 100 दिनों का काम पूरा किया।

वर्तमान वित्तीय वर्ष की स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। अब तक सिर्फ 6.74 लाख परिवार ही 100 दिन की सीमा तक पहुंच सके हैं। इससे साफ है कि रोजगार की कानूनी गारंटी और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। सरकार का मानना है कि रोजगार के दिनों को 125 तक बढ़ाने से ग्रामीण आय में इजाफा होगा और पलायन पर भी अंकुश लगेगा।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर
यदि रोजगार के दिनों को 125 तक बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ज्यादा दिनों तक काम मिलने से किसानों, मजदूरों और भूमिहीन परिवारों की आय में स्थिरता आएगी। इसके साथ ही कृषि से जुड़े ऑफ-सीजन में ग्रामीणों को वैकल्पिक रोजगार मिलेगा।

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विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और ग्रामीण संकट के दौर में मनरेगा की भूमिका और भी अहम हो गई है। ऐसे में रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी ग्रामीण भारत को आर्थिक संबल दे सकती है।

कानूनी संशोधन की जरूरत, जल्द आ सकता है फैसला
मनरेगा में रोजगार के दिनों की सीमा बढ़ाने और नाम परिवर्तन के लिए कानून में संशोधन करना होगा। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस पर जल्द फैसला ले सकती है और आगामी सत्र में विधेयक लाया जा सकता है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो मनरेगा अपने अस्तित्व के बाद सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजरेगा। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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