वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने तोड़ी चुप्पी, बोले- सरकारी गाड़ी मेरे पास ही है, अफवाहों पर न करें भरोसा
रांची: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकारी गाड़ी लौटाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही चर्चाओं पर आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी सरकारी गाड़ी अब भी उनके पास है और उसे लौटाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में एक नई टोयोटा इनोवा खरीदी है और शुक्रवार को उसी निजी वाहन से प्रोजेक्ट भवन पहुंचे थे, जबकि सरकारी वाहन भी उनके साथ मौजूद था।
नई इनोवा से पहुंचे प्रोजेक्ट भवन
शुक्रवार को वित्त मंत्री अपनी नई खरीदी गई इनोवा से प्रोजेक्ट भवन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने वित्त विभाग से संबंधित विभिन्न फाइलों का निपटारा किया और विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक भी की। मंत्री के साथ उनकी सरकारी गाड़ी भी मौजूद रही। इससे उन चर्चाओं पर विराम लग गया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उन्होंने सरकारी वाहन वापस कर दिया है।
सरकारी गाड़ी लौटाने की खबरों को बताया अफवाह
मीडिया से बातचीत में राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ यूट्यूब चैनलों पर चल रही खबरों की उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “मेरी सरकारी गाड़ी मेरे पास है। मैंने नई गाड़ी खरीदी है और उसी से कार्यालय गया था। इसका मतलब यह नहीं कि मैंने सरकारी गाड़ी लौटा दी है।” उन्होंने मीडिया से अपील की कि किसी भी खबर को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए।
सरकार की स्थिरता पर भी दिया संदेश
हाल के दिनों में उनके नाम को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं पर भी वित्त मंत्री ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार पूरी मजबूती के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा,
“हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार मजबूती से चल रही है। मेरी कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है।”
उन्होंने सरकार के भीतर किसी प्रकार के मतभेद या असहमति की खबरों को भी खारिज किया।
अटकलों पर लगाया विराम
वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ दिनों से उनके सरकारी वाहन, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक नाराजगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया कि नई निजी गाड़ी खरीदने का अर्थ सरकारी सुविधाएं छोड़ना नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना पुष्टि के फैलाई जा रही खबरों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है और तथ्यात्मक पत्रकारिता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।






