मोदी-शी मुलाकात: 55 मिनट की गुप्त बातचीत से भारत-चीन रिश्तों में नई उम्मीद

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सीमा शांति, कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीधी उड़ानों पर बनी सहमति, भरोसे और सम्मान के आधार पर रिश्ते मजबूत करने का संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तियानजिन शहर में लगभग 55 मिनट लंबी द्विपक्षीय मुलाकात हुई। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जिसने भारत-चीन रिश्तों में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए।

इस मुलाकात को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि बीते कुछ वर्षों से सीमा विवाद और तनावों ने दोनों देशों के संबंधों पर गहरी छाया डाल रखी थी। लेकिन तियानजिन में हुई इस बातचीत ने संकेत दिया कि अब दोनों देश रिश्तों को भरोसे, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर नए सिरे से परिभाषित करना चाहते हैं।

पीएम मोदी का स्पष्ट संदेश
बैठक की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले साल रूस के कजान में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात बेहद सार्थक रही थी और उससे रिश्तों को सकारात्मक दिशा मिली थी। उन्होंने बताया कि सीमा प्रबंधन पर विशेष प्रतिनिधियों के बीच समझौता हो चुका है और अब सीमा पर शांति और स्थिरता का माहौल है।

मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत-चीन सहयोग से न केवल 2.8 अरब लोगों का जीवन बेहतर होगा, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए भी सकारात्मक योगदान देगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू कर दिया गया है और भारत-चीन के बीच सीधी उड़ान सेवाएं भी पुनः चालू हो रही हैं।

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शी जिनपिंग का संदेश
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और चीन का एकजुट होना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दोनों देश दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले राष्ट्र हैं और अगर भारत-चीन साथ आगे बढ़ते हैं, तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर होगा।
जिनपिंग ने प्रतीकात्मक रूप से कहा – “ड्रैगन और हाथी का एक साथ आना जरूरी है।” उनका यह बयान साफ दर्शाता है कि चीन भारत के साथ रिश्तों को केवल कूटनीतिक औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देख रहा है।

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SCO के मंच से नई संभावनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान SCO की सफल अध्यक्षता के लिए शी जिनपिंग को बधाई दी और चीन आने के निमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातचीत आपसी सहयोग की नई संभावनाएं खोलती है।

मुलाकात का महत्व
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब वैश्विक स्तर पर भारत और चीन दोनों को अपने-अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के साथ ही नए साझेदारी की जरूरत है। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के बदलते रुख ने एशिया की राजनीति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में भारत-चीन के बीच संवाद न केवल द्विपक्षीय रिश्तों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्रीय संतुलन के लिए भी अहम है।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी और शी जिनपिंग की यह 55 मिनट की गुप्त मुलाकात रिश्तों में नए अध्याय की ओर संकेत करती है। सीमा विवाद और तनावों के बाद अब दोनों देश आपसी सहयोग और विश्वास की नींव पर आगे बढ़ना चाहते हैं। इस मुलाकात से साफ है कि भारत और चीन आने वाले समय में न केवल पड़ोसी, बल्कि भरोसेमंद साझेदार बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

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