राष्ट्रपति की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही, केरल में हेलीकॉप्टर धंसा कच्चे हैलीपैड में

Helipad Accident

केरल: द्रौपदी मुर्मू की सबरीमाला यात्रा के दौरान राष्ट्रपति की सुरक्षा में एक बड़ी चूक सामने आई है। बुधवार को प्रमदम स्थित राजीव गांधी इंडोर स्टेडियम में बने अस्थायी हैलीपैड पर राष्ट्रपति के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान उसका पहिया अचानक धंस गया। घटना के वक्त हेलीकॉप्टर में राष्ट्रपति मौजूद थीं, लेकिन गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। पुलिसकर्मियों और फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हेलीकॉप्टर को गड्ढे से बाहर निकाला।

रात में बना था हैलीपैड, सुबह हुई लैंडिंग
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार राष्ट्रपति के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए प्रमदम को अंतिम समय पर चुना गया था। मंगलवार देर रात ही वहां हैलीपैड बनाया गया था। कंक्रीट पूरी तरह सूखा नहीं था और इसी वजह से लैंडिंग के समय हेलीकॉप्टर का वजन संभाल नहीं पाया। पहियों का दबाव पड़ते ही हैलीपैड धंसने लगा और गड्ढे बनते चले गए। पहले राष्ट्रपति के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग निलक्कल में होनी थी, लेकिन खराब मौसम के चलते स्थान को बदलना पड़ा।

सुरक्षा में चूक पर मचा हड़कंप
हैलीपैड धंसने की घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल स्थिति को संभालते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित निकाला। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद की सुरक्षा में इस तरह की लापरवाही गंभीर है और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

सबरीमाला मंदिर में दर्शन करने पहुंचीं राष्ट्रपति
घटना के बाद राष्ट्रपति का काफिला सड़क मार्ग से पंबा के लिए रवाना हुआ। राष्ट्रपति मुर्मू सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शन करने पहुंचीं। वह इस मंदिर में पूजा करने वाली देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। वहीं पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरि के बाद वह इस मंदिर में दर्शन करने वाली दूसरी राष्ट्रपति भी हैं। गिरि ने 1970 के दशक में मंदिर में दर्शन किए थे।

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दिनभर व्यस्त रहा राष्ट्रपति का कार्यक्रम
राष्ट्रपति की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा के तहत बुधवार को वह सुबह सबरीमाला पहुंचीं। शाम को वह तिरुवनंतपुरम लौटेंगी और के.आर. नारायणन की प्रतिमा का अनावरण करेंगी।

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जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद से सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठने लगे हैं। कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की गहन जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय प्रशासन ने भी लापरवाही के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान इस तरह की लापरवाही ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए प्रशासनिक सतर्कता की भी आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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