बोकारो में मनरेगा कर्मियों की हड़ताल 37वें दिन भी जारी, पंचायत योजनाएं प्रभावित
बोकारो: झारखंड में मनरेगा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब साफ तौर पर पंचायत स्तर की योजनाओं पर दिखाई देने लगा है। बोकारो जिले में हड़ताल के 37वें दिन सभी मनरेगा कर्मी जिला मुख्यालय के सामने एकत्र होकर धरना पर बैठे और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।
यह हड़ताल झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
जिला मुख्यालय के सामने धरना
धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के जिला अध्यक्ष सुनील चंद्र दास ने की। उन्होंने कहा कि हड़ताल को 37 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक राज्य सरकार या विभागीय मंत्री की ओर से मनरेगा कर्मियों से वार्ता नहीं की गई है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
पंचायत योजनाएं ठप
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली कई योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। पंचायतों में मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्य लगभग ठप पड़ गए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि काम बंद रहने से न केवल योजनाओं का क्रियान्वयन रुक गया है, बल्कि इससे ग्रामीण मजदूरों और लाभुकों को भी काफी परेशानी हो रही है।
मजदूरों के सामने रोज़गार का संकट
धरना में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि मनरेगा योजनाएं बंद रहने से ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। कई मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि कई गांवों में स्थिति ऐसी हो गई है कि मजदूरों के घरों में चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है।
सरकार से वार्ता की मांग
धरना में शामिल कर्मचारियों ने सरकार से जल्द बातचीत शुरू करने और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
झारखंड में मनरेगा कर्मियों की यह लंबी हड़ताल अब प्रशासन और ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।






