ईरान युद्ध LIVE: 35 देशों की अहम बैठक, होर्मुज संकट पर भारत भी करेगा मंथन

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ट्रंप की फिर चेतावनी—“समझौता नहीं तो ईरान के प्लांट्स तबाह कर देंगे”

मुनादी लाइव : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब वैश्विक स्तर पर बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। ईरान युद्ध के बीच 35 देशों की एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें भारत भी शामिल होगा। इस बैठक में खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट और वैश्विक तेल आपूर्ति पर चर्चा की जाएगी।

ट्रंप का फिर आक्रामक बयान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और खार्ग द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर देगा।

‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ लक्ष्य के करीब
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा चलाया जा रहा सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” अपने मुख्य लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले चार हफ्तों में अमेरिकी सेना ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए ईरान की सैन्य ताकत को काफी कमजोर कर दिया है।

ईरान की सैन्य क्षमता पर बड़ा दावा
ट्रंप के अनुसार:

  • ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है
  • वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है
  • मिसाइल और ड्रोन हमले की क्षमता काफी हद तक खत्म हो गई है
  • हथियार निर्माण फैक्ट्रियां और लॉन्चिंग सिस्टम नष्ट कर दिए गए हैं
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हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

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क्यों अहम है 35 देशों की बैठक?
यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल सप्लाई का प्रमुख मार्ग है
  • यहां संकट बढ़ने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है
  • भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा बड़ा मुद्दा बन सकता है

भारत की भूमिका पर नजर
भारत इस बैठक में शामिल होकर अपनी ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अपना पक्ष रखेगा। माना जा रहा है कि भारत संतुलित कूटनीति के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने पर जोर देगा।

वैश्विक तनाव चरम पर
ट्रंप के आक्रामक बयान, सैन्य कार्रवाई के दावे और अब 35 देशों की बैठक—ये सभी संकेत दे रहे हैं कि मिडिल ईस्ट का संकट अब वैश्विक मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह टकराव कूटनीति से सुलझेगा या और गहरा होगा।

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