गोवा नाइट क्लब हादसा: रांची पहुंचे झारखंड के तीन युवकों के शव, एयरपोर्ट पर मातम
रांची | Munadi Live: गोवा के नाइट क्लब में हुए भीषण अग्निकांड ने झारखंड के तीन घरों के चिराग बुझा दिए। शनिवार रात हुए हादसे में जान गंवाने वाले झारखंड के तीन युवकों का पार्थिव शरीर आज रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट लाया गया, जहां का मंजर देख हर आंख नम हो गई। जैसे ही विमान से ताबूत बाहर लाया गया, एयरपोर्ट परिसर में चीख-पुकार गूंज उठी। रोते बिलखते परिजन, सिसकते बच्चे और स्तब्ध खड़े ग्रामीण— हर चेहरा दर्द बयां कर रहा था।
दो सगे भाई और खूंटी का एक युवक, तीन जिंदगियां खत्म
इस हादसे में जान गंवाने वालों में
- प्रदीप महतो
- विनोद महतो
(दोनों सगे भाई, रांची जिला के लापुंग प्रखंड के फतेहपुर गांव निवासी)
और - मोहित मुंडा, निवासी गोविंदपुर, कर्रा प्रखंड (खूंटी जिला)
शामिल हैं।
तीनों युवक रोजगार की तलाश में गोवा गए थे और उसी नाइट क्लब में काम कर रहे थे, जहां गैस सिलेंडर विस्फोट के बाद आग लगने से यह भीषण हादसा हुआ।
गैस सिलेंडर विस्फोट में गई जान
बताया गया कि गोवा के जिस नाइट क्लब में हादसा हुआ, वहां रसोई में लगा गैस सिलेंडर अचानक फट गया। विस्फोट इतना भीषण था कि देखते ही देखते आग फैल गई और कई लोग बाहर निकलने का मौका तक नहीं पा सके। प्रदीप, विनोद और मोहित की भी मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे की खबर जब झारखंड पहुंची, तो पूरे लापुंग और कर्रा प्रखंड में मातम पसर गया।
एयरपोर्ट पर दिल दहला देने वाला दृश्य
रांची एयरपोर्ट पर परिजनों का दर्द हर किसी को झकझोर देने वाला था। मां-बाप बेसुध थे, बहनें ताबूत से लिपटकर रो रही थीं,
और गांव के लोग शोक में डूबे खड़े थे। एक बुजुर्ग की आंखों से निकलते शब्द थे—
“हमने अपने बच्चों को गरीब होने की सजा दी है क्या?”
“हमारे बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन?”
परिजनों ने हादसे को लेकर कई सवाल उठाए। उनका कहना है कि नाइट क्लब में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, और इसी लापरवाही ने उनके बच्चों की जान ले ली। ग्रामीणों का कहना है कि—
“अगर वहां सुरक्षा होती, तो आज हमारे बच्चे जिंदा होते।”
सरकार से मुआवजे की मांग
पीड़ित परिवारों ने राज्य और केंद्र सरकार से मुआवजे की मांग की है। एक परिजन ने कहा—
“हम गरीब लोग हैं… हमारे बेटों को लौटा नहीं सकते, लेकिन सरकार हमारा सहारा बने।”
परिजनों का कहना है कि जिन युवकों की मौत हुई, वे अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।
प्रशासन मौके पर मौजूद, आगे की प्रक्रिया जारी
रांची और खूंटी जिला प्रशासन के अधिकारी एयरपोर्ट पर मौजूद रहे। शवों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके पैतृक गांव भेजने की तैयारी की गई। जिला प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि
- हर संभव सरकारी सहायता दिलाने की कोशिश की जाएगी
- पीड़ित परिवारों की मदद के लिए रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी
गोवा नाइट क्लब हादसा सिर्फ एक अग्निकांड नहीं, बल्कि गरीबी, मजबूरी और लापरवाही की दर्दनाक कहानी है। रोज़गार की तलाश में घर से दूर गए झारखंड के तीन युवा कभी वापस नहीं लौट पाए। आज रांची एयरपोर्ट पर पसरा सन्नाटा यही सवाल छोड़ गया— क्या आम लोगों की जान की कीमत सिर्फ शोक संदेशों तक ही सिमट जाएगी, या उन्हें इंसाफ और सहारा भी मिलेगा?






