अरुणाचल प्रदेश में खाई में गिरा मजदूरों से भरा ट्रक, 22 की मौत की आशंका — दुर्गम इलाके में रेस्क्यू जारी

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अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश से गुरुवार सुबह एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई, जिसने पूरे पूर्वोत्तर को झकझोर दिया है। भारत-चीन सीमा के नज़दीक स्थित दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर मजदूरों से भरा एक ट्रक अचानक अनियंत्रित हो गया और सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ट्रक में कुल 23 मजदूर सवार थे, जिनमें से 22 की मौत की आशंका जताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक अब तक 13 शव खाई से बरामद किए जा चुके हैं, जबकि बाकी मजदूरों की तलाश लगातार जारी है।

हादसा जिस इलाके में हुआ है, वह घने जंगलों, संकरे रास्तों और बेहद खराब मौसम के लिए जाना जाता है। यहां न केवल खाई बेहद गहरी हैं, बल्कि सड़कें भी कई जगहों पर फिसलनभरी और टूटी हुई रहती हैं, जिससे वाहन अक्सर खतरे में पड़ जाते हैं। यही वजह है कि राहत एवं बचाव कार्य को अंजाम देना टीमों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, मजदूर सड़क निर्माण परियोजना के लिए जा रहे थे, जो भारत-चीन सीमा से सटे इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित है। यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां निर्माण कार्य तेज़ी से जारी हैं। हादसे में शामिल ट्रक खराब मौसम और कम दृश्यता की वजह से मोड़ पर संतुलन खो बैठा, जिसके बाद चालक उसे नियंत्रित नहीं कर सका।

स्थानीय प्रशासन को जैसे ही हादसे की सूचना मिली, दमकल विभाग, जिला पुलिस और डीआरएफ की टीमें तुरंत रवाना की गईं। दुर्गम रास्तों की वजह से बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी समय लगा। टीमों ने घने कोहरे और बारिश के बीच खाई में उतरकर शवों को निकालने का काम शुरू किया। कई स्थानों पर रस्सियों और सुरक्षा हार्नेस की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

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अधिकारियों ने बताया कि मौसम और भू-भाग राहत अभियान के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। तेज ठंड, खाई की गहराई और फिसलन भरी चट्टानें हर कदम पर जोखिम बढ़ा देती हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार काम कर रही हैं ताकि लापता मजदूरों तक जल्द पहुंचा जा सके।

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स्थानीय प्रशासन ने पास के स्वास्थ्य केंद्रों में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया है। घायलों की तलाश जारी है और जैसे ही कोई जीवित व्यक्ति मिलता है, उसे तत्काल हेलिकॉप्टर अथवा एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल ले जाया जाएगा। खोज अभियान को तेज करने के लिए ड्रोन और थर्मल इमेजिंग कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस दुर्घटना ने फिर एक बार पर्वतीय क्षेत्रों में वाहनों की सुरक्षा और मॉनसून व सर्द मौसम में निर्माण कार्य से जुड़े जोखिमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूरों की मुश्किल परिस्थितियों में यात्रा, खराब सड़कें और सुरक्षा मानकों की कमी अक्सर ऐसे हादसों को न्योता देती हैं।

घटना के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी रेस्क्यू की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा देने और घायलों के इलाज का पूरा खर्च वहन करने का आश्वासन दिया है। इस हादसे की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पहचान की जा सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

दुर्गम इलाके, खराब मौसम और सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण राहत कनिष्ठ अधिकारियों से लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक हर स्तर पर समन्वय से चल रही है। उम्मीद की जा रही है कि देर शाम तक सभी मजदूरों तक रेस्क्यू टीमें पहुंच जाएंगी।

अरुणाचल प्रदेश का यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सीमा से जुड़े इलाकों में अवसंरचना निर्माण के साथ-साथ मजदूरों की सुरक्षा और सुरक्षित यात्रा की व्यवस्था सुनिश्चित करना कितना जरूरी है। फिलहाल पूरा क्षेत्र शोक में डूबा हुआ है और देशभर से संवेदनाएं लगातार पहुंच रही हैं।

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