रिम्स जमीन विवाद में सियासी हलचल हुई तेज
Ranchi : रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की जमीन पर अवैध कब्जा हटाने के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और बेघर हुए लोगों को राहत देने की मांग की है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठाए गंभीर सवाल
अपने खुले पत्र में बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया है कि जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण रिम्स जैसी महत्वपूर्ण सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा आखिर कैसे पनपने दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन के कुछ हिस्सों को बाजार में बेचा गया, जिससे आम नागरिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
मरांडी ने स्पष्ट कहा कि जब कोई आम व्यक्ति जमीन या फ्लैट खरीदता है, तो उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह यह जांच करे कि जमीन सरकारी है या निजी। यह जिम्मेदारी सरकार, रजिस्ट्री कार्यालय और संबंधित प्रशासनिक तंत्र की होती है।

रजिस्ट्रार, नगर निगम और रेरा की भूमिका पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में यह भी पूछा कि तत्कालीन रजिस्ट्रार ने कथित तौर पर रिश्वत लेकर म्यूटेशन कैसे कर दिया। साथ ही, रांची नगर निगम ने अवैध रूप से बने अपार्टमेंट के नक्शे को किस आधार पर मंजूरी दी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जांच के बावजूद रेरा (RERA) जैसी नियामक संस्था ने ऐसे प्रोजेक्ट को स्वीकृति कैसे दे दी।
मरांडी ने पूरे मामले को केवल जमीन विवाद नहीं, बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक और संस्थागत विफलता बताया है, जिसमें कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस प्रकरण में शामिल रजिस्ट्रार, अंचल अधिकारी और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए और उन्हें निलंबित किया जाए। उन्होंने कहा कि बिना कठोर कार्रवाई के भविष्य में इस तरह के मामलों पर रोक लगाना संभव नहीं होगा।
बेघर लोगों के लिए राहत की अपील
खुले पत्र में मरांडी ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि जिन निर्दोष लोगों ने अवैध रूप से बने फ्लैट खरीदे हैं, उन्हें सजा देना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को या तो उन्हें वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराना चाहिए या फिर फ्लैट की पूरी कीमत का मुआवजा देना चाहिए।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस मामले में सरकार की संवेदनशीलता ही यह तय करेगी कि आम जनता का भरोसा शासन व्यवस्था पर बना रहेगा या नहीं।






