18 साल बाद भारत–यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता

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New Delhi: नई दिल्ली से वैश्विक व्यापार जगत के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लगभग 18 वर्षों की लंबी वार्ताओं के बाद बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस समझौते को दोनों पक्षों की आर्थिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है, जो बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बीच रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है।

यूरोपीय संघ के अनुसार इस समझौते के लागू होने के बाद भारत को होने वाले उसके निर्यात में तेज़ वृद्धि होगी। अनुमान है कि वर्ष 2032 तक ईयू का भारत को निर्यात दोगुना हो सकता है। फिलहाल यूरोपीय संघ का भारत को निर्यात यूरोप में लगभग आठ लाख नौकरियों को समर्थन देता है, और इस समझौते से रोजगार के और अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

90 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर शुल्क में बड़ी राहत
इस करार के तहत भारत को निर्यात होने वाले 90 प्रतिशत से अधिक यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क या तो समाप्त कर दिया जाएगा या फिर उसमें बड़ी कटौती की जाएगी। यह कदम भारत के बाजार को यूरोपीय उत्पादों के लिए अधिक सुलभ बनाएगा, वहीं भारतीय उद्योगों को भी सस्ती तकनीक और कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

ग्रीन ट्रांजिशन के लिए 500 मिलियन यूरो की मदद
इस समझौते का एक अहम पहलू हरित परिवर्तन (Green Transition) से भी जुड़ा है। यूरोपीय संघ ने भारत को अगले दो वर्षों में 500 मिलियन यूरो (करीब 4,500 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और हरित तकनीकों को अपनाने में सहयोग देना है।

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ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, कारें होंगी सस्ती
सबसे अधिक चर्चा मोटर वाहन क्षेत्र में प्रस्तावित बदलावों को लेकर है। वर्तमान में आयातित कारों पर लगने वाला लगभग 110 प्रतिशत शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा। हालांकि यह रियायत प्रति वर्ष 2.5 लाख वाहनों के कोटे तक सीमित रहेगी। यानी हर साल समझौते के तहत आने वाले पहले ढाई लाख वाहनों को ही इस कम शुल्क का लाभ मिलेगा। इससे भारत में प्रीमियम कारों की कीमतों पर असर पड़ सकता है और ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है।

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खाद्य और पेय पदार्थों पर भी असर
समझौते के तहत यूरोपीय खाद्य और पेय उत्पादों को भी राहत मिलेगी। बीयर पर शुल्क घटाकर 50 प्रतिशत, स्पिरिट्स (शराब) पर करीब 40 प्रतिशत और वाइन पर 20 से 30 प्रतिशत के बीच शुल्क रहने की बात कही गई है। इसके अलावा ऑलिव ऑयल, मार्जरीन और कुछ वनस्पति तेलों पर शुल्क समाप्त किया जाएगा। फलों के जूस और प्रोसेस्ड फूड पर भी शुल्क खत्म करने का प्रावधान शामिल है।

रसायन, मशीनरी और फार्मा को बड़ा फायदा
यूरोपीय संघ का कहना है कि उसके लगभग सभी रसायन उत्पादों पर शुल्क समाप्त कर दिए जाएंगे। यह क्षेत्र व्यापक औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला का आधार है, जिसका असर फार्मास्यूटिकल्स से लेकर उपभोक्ता वस्तुओं तक पड़ेगा। मशीनरी पर लगने वाला 44 प्रतिशत तक का शुल्क बड़े पैमाने पर हटाया जाएगा, जबकि फार्मास्यूटिकल्स पर 11 प्रतिशत तक के शुल्क में भारी कटौती होगी। ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के अधिकांश उत्पादों पर भी टैरिफ समाप्त किए जाने से अस्पतालों और क्लीनिकों में इस्तेमाल होने वाले आयातित उपकरणों की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है।

एयरोस्पेस और हाई-टेक सेक्टर को भी बढ़ावा
समझौते के तहत विमान और अंतरिक्ष यानों से जुड़े लगभग सभी उत्पादों पर शुल्क समाप्त करने का प्रावधान है। इससे हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और एविएशन सेक्टर में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।

सेवाएं, डिजिटल व्यापार और MSME पर खास फोकस
FTA में डिजिटल व्यापार को सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए अलग अध्याय शामिल किया गया है। यूरोपीय सेवा प्रदाताओं को वित्तीय और समुद्री सेवाओं में विशेष पहुंच मिल सकती है। साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए अलग प्रावधान रखे गए हैं, जिनमें संपर्क केंद्र स्थापित कर व्यापार और निवेश प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और गहराई से जोड़ने में मदद करेगा, जबकि यूरोपीय संघ के लिए यह दुनिया के सबसे बड़े और तेज़ी से बढ़ते उपभोक्ता बाजारों में से एक तक नियम-आधारित स्थायी पहुंच सुनिश्चित करेगा।

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